लोगों की सेवा करने की सोच ने बदला बिरहोर और जरूरतमंद बच्चों का जीवन

रायगढ़ October 18, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
लोगों की सेवा करने की सोच ने बदला बिरहोर और जरूरतमंद बच्चों का जीवन

लोगों की सेवा करने की सोच ने बदला बिरहोर और जरूरतमंद बच्चों का जीवन

ग्रामीण क्षेत्र की किशोरियों, महिलाओं, दिव्यांग, कुपोषित बच्चों के लिए भी किया जा रहा काम
रायगढ़ टॉप न्यूज 18 अक्टूबर। ऐसे लोग जो बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित थे, ऐसे लोगों की सेवा कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए काम करने की अभिलाषा को साकार करते हुए जिंदल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिंदल ने विशेष काम करने की ठानी। इस सोच को अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने काम शुरू किया। इन कार्यों के शुरू होने से बिरहोर जैसी विशेष जनजाति के बच्चे अब बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। इसके अलावा कोविड के दौर में जब पूरा विश्व महामारी से जूझ रहा था, तब कई घर ऐसे थे जिनके मां और पिता सहित पालकों की कोविड के कारण मौत हो गई। ऐसे बच्चों के सामने परवरिष की समस्या आ गई। ऐसे बच्चों की समस्याओं को देखते हुए उन्होंने जिंदल चिल्ड्रन होम शुरू कराया।

जिंदल पाॅवर तमनार लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर सुधारने के लिए लगातार काम कर रहा है। ग्राम पंचायत कचकोबा के आश्रित गांव सीतापारा में रहने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र, विलुप्त हो रही विशेष जनजाति बिरहोर लोगों को समाज के मुख्य धारा में जोड़ने, उनके सर्वांगिण विकास का बीड़ा जिंदल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिंदल ने उठाया। उनके विशेष दिशा निर्देश पर यहां रहने वाले 30 परिवारों के लिए काम शुरू किया गया। यह विशेष जनजाति मुख्य धारा से अलग केवल वनों पर आश्रित थी। ऐसी स्थिति में उन्हें खाने पीने तक के सामान के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता था। यहां सहारा बिरहोर स्व सहायता समूह का गठन किया गया। व्यवसाय करने के लिए महिलाओं को बकरा और बकरी दिए गए, इससे उन्हें आर्थिक लाभ हुआ, फिर इन्हें बोरी की रस्सी बनाने के व्यवसाय से जोड़ा गया। इससे उन्हें रोजगार मिला। इसके बाद यहां के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए गांव में ही बालवाड़ी शुरू की गई, गांव की ही कविता बिरहोर को जिम्मेदारी दी गई, इस केंद्र में बच्चों को पौष्टिक नाश्ता से लेकर दोपहर का भोजन व शाम का नाश्ता तक दिया जाता है। इस केंद्र से निकलने वाले बच्चों को अब कक्शा नर्सरी से ही ओपी जिंदल स्कूल कुंजेमुरा में भर्ती किया जा रहा है। जहां उन्हें अंग्रेजी माध्यम की बेहतरीन शिक्षा मिल रही है। शिक्षा से यहां के लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है, पहले जहां अशिक्षा थी, वहां के लोग अब दसवीं, बारहवीं तक की पढ़ाई कर रहे हैं।


जरूरतमंद बच्चों के लिए सहारा बना जिंदल चिल्ड्रन होम
कोविड 19 के दौरान कई घरों में ऐसी स्थिति थी कि बच्चों के मां और पिता तक नहीं रहे। ऐसे बच्चों के परवरिष की जिम्मेदारी उठाने वाला भी कोई नहीं था। इसके अलावा कुछ सिंगल पैरेंट वाले बच्चे भी थे। जिन्हें सुव्यवस्थित आवास, शिक्षा आदि उपलब्ध कराने के लिए जिंदल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिंदल ने सावित्रीनगर में जिंदल चिल्ड्रन होम की कल्पना की। उनकी दूरदर्शी सोच के कारण वर्तमान में लड़के, लड़कियों के लिए अलग अलग करीब 100 सीट का जिंदल चिल्ड्रन होम संचालित हो रहा है। सीडब्ल्यूसी द्वारा ऐसे जरूरतमंद बच्चों को यहां भेजा जाता है इन बच्चों को न सिर्फ यहां रखा जाता है, बल्कि उनकी पढ़ाई से लेकर पूरी व्यवस्था का खर्च जिंदल फाउंडेशन द्वारा वहन किया जाता है। इस संस्था का उद्देश्य न केवल ऐसे बच्चों को केवल 18 साल तक रखना ही नहीं बल्कि शिक्शा के बाद उन्हें सक्शम बनाना भी है।

34 सौ से अधिक हुए कुपोशण मुक्त
जिंदल फाउंडेशन द्वारा माइंस एरिया के 41 और प्लांट एरिया के 46 गांवों में स्वास्थ्य के क्शे़त्र में विशेश काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का अभाव होने के कारण बच्चे कुपोषित हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को सुपोषित करने के लिए चिरंजीवी योजना का संचालन किया जा रहा है। जिसमें 6 माह से लेकर 5 वर्श तक के बच्चों को कुपोषण से बचाया जा रहा है। ऐसे बच्चों की पहचान के बाद जांच व उन्हें पोषण युक्त आहार, जरूरी दवाएं, प्रोटिन पाउडर आदि दिया जा रहा है, ऐसे बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्शण भी होता है। अभी तक 3400 से अधिक बच्चों को जिंदल फाउंडेशन द्वारा कुपोषण से मुक्त किया जा चुका है।

महिलाओं, किशोरियों, दिव्यांगों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
उचित पोषण के अभाव में किशोरी बालिकाएं और गर्भवती महिलाएं एनिमिक हो जाती हैं। इसलिए जिंदल फाउंडेशन द्वारा एनिमिया दूर करने के लिए किशोरी एक्सप्रेस संचालित की जा रही है तो गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को एनिमिया से बचाने के लिए वात्सल्य योजना संचालित की जा रही है। वहीं दिव्यांग बच्चों के लिए जिंदल आशा का भी संचालन हो रहा है। किशोरी एक्सप्रेस क्षेत्र के सभी 87 गांवों में नियमित रूप से जाती हैं। इन सभी गांवों में स्वास्थ्य संगिनी बनाई गई हैं। सुसज्जित वैन व प्रशिक्षित स्टाफ इन सभी गांवों और स्कूलों में जाकर किशोरी बालिकाओं की हिमोग्लोबिन की जांच करते हैं। एनिमिक किशोरियों की काउंसिलिंग कर पोषण आहार के बारे में बताया जाता है। सीवियर एनिमिक होने पर उनकी जांच ओपीजे अस्पताल में कराई जाती है, इस योजना से अभी तक करीब 35 सौ किशोरियां अभी तक लाभान्वित हो चुकीं हैं।

गर्भवती महिलाओं के पंजीयन से लेकर प्रसव तक जिम्मेदारी
जिंदल फाउंडेशन द्वारा वात्सल्य योजना के तहत प्रत्येक गांव में वात्सल्य केंद्र बनाया गया है, जहां 24 घंटे सातों दिन प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध रहती है। स्वास्थ्य संगीनी द्वारा प्रसव पूर्व महिलाओं के पंजीयन से लेकर 9 माह तक देख रेख करतीं हैं। इस दौरान समय पर टीका लगवाना सुनिश्चित किया जाता है, एनिमिक होने पर उनकी प्राॅपर देखभाल की जाती है, जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लड भी चढ़ाया जाता है ताकि प्रसव के समय कोई परेशानी न हो। संस्थागत प्रसव कराया जाता है, बच्चों को भी नियमित समय पर टीके लगवाए जाते हैं। इसका परिणाम यह है कि तमनार क्शेत्र के गांवों में पिछले दो सालों से मातृ और शिशु मृत्यु के मामलों में कमी आई है।

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