रायगढ़: “ऑपरेशन आघात” का खौफ या तस्करों का टूटता नेटवर्क, नाकेबंदी में फंसी कार से निकला चौंकाने वाला सच

छत्तीसगढ़ April 21, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
रायगढ़: “ऑपरेशन आघात” का खौफ या तस्करों का टूटता नेटवर्क, नाकेबंदी में फंसी कार से निकला चौंकाने वाला सच

रायगढ़: “ऑपरेशन आघात” का खौफ या तस्करों का टूटता नेटवर्क, नाकेबंदी में फंसी कार से निकला चौंकाने वाला सच

रायगढ़ में नशे के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। “ऑपरेशन आघात” के तहत लगातार दूसरे दिन हुई इस कार्रवाई ने तस्करी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, जहां एक साधारण दिखने वाली कार से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया।

Raigarh जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Shashi Mohan Singh के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत थाना साइबर और चक्रधरनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने उड़ीसा से रायगढ़ लाए जा रहे गांजे की बड़ी खेप पकड़ी है। पुलिस ने 36 किलो 170 ग्राम गांजा, एक चारपहिया वाहन और मोबाइल फोन सहित कुल लगभग 15 लाख 60 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

पुलिस को पहले ही सूचना मिल चुकी थी कि एक सफेद कार के जरिए अवैध गांजा रायगढ़ क्षेत्र में खपाने की तैयारी है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने बंगुरसिया ढाबा के पास नाकेबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका। तलाशी के दौरान कार में प्लास्टिक बोरियों में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ, जिससे मौके पर ही हड़कंप मच गया।

कार में सवार तीनों आरोपियों की पहचान डोल नारायण साहू, नीलकमल साव और आशीष कुमार सिंह के रूप में हुई, जो रायगढ़ जिले के ही निवासी हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे उड़ीसा से गांजा लाकर मिलकर उसकी सप्लाई करते थे और रकम का आपस में बंटवारा करते थे।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (बी) और 29 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

इस पूरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर और थाना प्रभारी विजय चेलक के नेतृत्व में पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और इस तरह के संगठित अपराध में शामिल हर व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

लगातार हो रही इस तरह की कार्रवाइयों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या “ऑपरेशन आघात” वास्तव में तस्करी के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में बढ़ रहा है या अभी और बड़े खुलासे सामने आना बाकी हैं।

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