3 साल तक कहां छिपा था रामगोपाल? सरेंडर के बाद 17 जुलाई तक रिमांड, अब खुलेंगे करोड़ों के घोटालों के राज!

छत्तीसगढ़ July 10, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
3 साल तक कहां छिपा था रामगोपाल? सरेंडर के बाद 17 जुलाई तक रिमांड, अब खुलेंगे करोड़ों के घोटालों के राज!

3 साल तक कहां छिपा था रामगोपाल? सरेंडर के बाद 17 जुलाई तक रिमांड, अब खुलेंगे करोड़ों के घोटालों के राज!

 

रायपुर।

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों में आरोपी पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के समक्ष सरेंडर कर दिया। गुरुवार को मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया।

EOW अब रिमांड के दौरान रामगोपाल अग्रवाल से कथित मनी ट्रेल, घोटालों में उनकी भूमिका और कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला लेवी, शराब और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, कोयला लेवी घोटाले की जांच के दौरान जब्त दस्तावेजों और डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित एंट्रियां मिली थीं। EOW का आरोप है कि इन पैसों के लेन-देन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच की जा रही है। वहीं, उनके बेटे वैभव अग्रवाल से भी दो दिनों तक पूछताछ की गई है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है और प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। कोर्ट परिसर में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही।

मुख्यमंत्री का जवाब

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “कानून अपना काम कर रहा है। किसी भी मामले में जांच साक्ष्यों के आधार पर होती है और यदि किसी को आपत्ति है तो न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सकता है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।”

तीन साल तक रहे फरार

जांच एजेंसियों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल पिछले लगभग तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे। उन्हें कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन वे पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। बाद में अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद उन्होंने EOW कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण किया।

अब जांच पर टिकी निगाहें

EOW की पूछताछ में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित घोटालों में उनकी भूमिका क्या थी और मनी ट्रेल से जुड़े कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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