रायगढ़ के चक्रधर समारोह में देर रात तक गूंजते रहे ठहाके, पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने हास्य-व्यंग्य से बांधा समां
रायगढ़ के चक्रधर समारोह में देर रात तक गूंजते रहे ठहाके, पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने हास्य-व्यंग्य से बांधा समां
रायगढ़ के चक्रधर समारोह में देर रात तक गूंजते रहे ठहाके, पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने हास्य-व्यंग्य से बांधा समां
41वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में सजा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, वीर रस, गीत और व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
रायगढ़, 20 सितंबर 2026। 41वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या शनिवार को हास्य, व्यंग्य, वीर रस और गीतों के रंग से सराबोर रही। रामलीला मैदान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी अलग-अलग प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा रहे, जिन्होंने अपनी चिर-परिचित हास्य-व्यंग्य शैली से लोगों को खूब गुदगुदाया।
करीब 40 वर्षों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने जीवन, समाज और बदलते परिवेश से जुड़े प्रसंगों को अपने खास अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी सहज और चुटीली शैली पर रामलीला मैदान लगातार ठहाकों और तालियों से गूंजता रहा।
हास्य के साथ दिया जीवन का संदेश
सुरेंद्र शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियों में हास्य के साथ जीवन के अनुभवों और सामाजिक सरोकारों को भी सामने रखा। उन्होंने संदेश दिया कि जिंदगी में व्यक्ति चाहे कितनी भी ताकत और ऊंचाई हासिल कर ले, उसे अहंकार से बचना चाहिए।
उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन और संस्कृति की झलक भी दिखाई दी। देश की मिट्टी और भारतीय संस्कृति की खुशबू को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने वाले शर्मा की प्रस्तुति का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
बेटियों और महिला सशक्तिकरण पर भी हुई बात
हास्य कवयित्री शशि सुरेंद्र दुबे ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बेटियों के महत्व और महिलाओं के सशक्तिकरण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां सुख-दुख के हर दौर में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहती हैं।
उन्होंने हास्य को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि हंसी निर्मल, निष्पक्ष और निर्दोष होनी चाहिए। उनकी हास्य-व्यंग्य प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को खूब हंसाया।
वीर रस की कवयित्री ने जगाया जोश
कवि सम्मेलन की शुरुआत वीर रस की कवयित्री कविता तिवारी ने मां सरस्वती की वंदना से की। इसके बाद उन्होंने युवाओं और बेटियों से जुड़े विषयों पर ओजपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कीं। नारी सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़े उनके संदेशों ने दर्शकों को प्रभावित किया।
बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर आधारित उनकी रचनाओं ने माहौल को भावुक कर दिया। वहीं गांधारी पर आधारित कविता को भी श्रोताओं की सराहना मिली।
छत्तीसगढ़ी गीतों से महकी माटी की खुशबू
गीतकार किशोर तिवारी ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचनाओं से कार्यक्रम में लोक संस्कृति के रंग भर दिए। उन्होंने “नया सूरज के नवा अंजोर”, “हरिहर धनिया” और “राम-राम बबा जोहार बूढ़ी दाई” जैसे गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की मिट्टी, लोकजीवन और संस्कृति की झलक दिखाई दी।
सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य
डॉ. प्रवीण शुक्ला ने अपने चिर-परिचित हास्य अंदाज में सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य किया और दर्शकों को खूब हंसाया। 36 वर्षों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय डॉ. शुक्ला की अब तक 27 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उज्जैन के हास्य कवि डॉ. दिनेश दिग्गज ने भी अपनी व्यंग्य रचनाओं के जरिए माहौल में हास्य का रंग घोला। वहीं गीतकार अमन अक्षर ने भावपूर्ण और मधुर गीतों की प्रस्तुति देकर कवि सम्मेलन की शाम को सुरमय बना दिया।
हास्य-व्यंग्य से लेकर वीर रस और भावपूर्ण गीतों तक अलग-अलग रंगों से सजी प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।