छत्तीसगढ़

 जशपुर में सोलर टनल ड्रायर से बदलेगी महुआ की तक़दीर! DST परियोजना से आदिवासी आजीविका को नई रफ्तार

धूप से बनेगा सुनहरा भविष्य—वैज्ञानिक तकनीक से महुआ और वनौषधियों का सुरक्षित मूल्य संवर्धन

जशपुर:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नवाचार और स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जशपुर जिला अब महुआ फूल के मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हो चुका है। महुआ नेक्टर, च्यवनप्राश, लड्डू, कुकीज़ जैसे पारंपरिक एवं पोषक उत्पादों के विकास के बावजूद अब तक खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रह और सुरक्षित निर्जलीकरण एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।

इस समस्या के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्वीकृत परियोजना
“Technological Augmentation of Indigenous Practices of ST Communities of Chhattisgarh for Sustainable Livelihood and Entrepreneurial Development”
वर्तमान में जशपुर जिले में क्रियान्वित की जा रही है।


🔬 वैज्ञानिक पहल, स्थानीय सहभागिता का मॉडल

यह परियोजना DST द्वारा वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी को स्वीकृत की गई है, जिसे स्थानीय समुदायों की सहभागिता के साथ ज़मीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है।
परियोजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), कुंडली के वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी द्वारा जशपुर में सोलर टनल ड्रायर की स्थापना की गई है।
इस पहल में जय जंगल फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का सक्रिय सहयोग रहा।


🌾 खुले में सुखाने की समस्या का वैज्ञानिक समाधान

फूड प्रोसेसिंग कंसल्टेंट एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि पारंपरिक खुले वातावरण में महुआ सुखाने से धूल, नमी और कीटों के कारण गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे बाज़ार में इसकी मांग और खाद्य उपयोग सीमित हो जाता है।
इन व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए नियंत्रित और वैज्ञानिक निर्जलीकरण प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई।

स्थापित सोलर टनल ड्रायर के माध्यम से महुआ फूलों को नियंत्रित तापमान में स्वच्छ, तेज़ और समान रूप से सुखाया जा सकता है। इससे:

  • 🌼 महुआ की गुणवत्ता, रंग और सुगंध सुरक्षित रहती है



















  • 🥗 पोषक तत्व संरक्षित रहते हैं

  • 📦 दीर्घकालीन भंडारण संभव हो पाता है

  • 🛡️ वर्षा, धूल और कीटों से सुरक्षा मिलती है

  • ☀️ पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित होने से यह पर्यावरण-अनुकूल है


👩‍🌾 आदिवासी महिलाओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

परियोजना के अंतर्गत महुआ के साथ-साथ वनौषधियों के निर्जलीकरण पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
आदिवासी महिला लाभार्थियों को गिलोय, अडूसा जैसी महत्वपूर्ण वन औषधियों और पालक जैसी मौसमी सब्ज़ियों के वैज्ञानिक व स्वच्छ निर्जलीकरण का लाइव डेमोंस्ट्रेशन कराया गया।

प्रशिक्षण में:

  • सुरक्षित हैंडलिंग

  • ट्रे लोडिंग तकनीक

  • नमी नियंत्रण

  • वैज्ञानिक भंडारण विधियाँ

पर विशेष जोर दिया गया।


🌱 तीन साल की मेहनत, टिकाऊ मॉडल की ओर

उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी पिछले तीन वर्षों से जशपुर जिले में निरंतर कार्य कर रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और तकनीकी क्षमता निर्माण में उनकी दीर्घकालिक सहभागिता से यह परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित एक व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल के रूप में उभर रही है।


📈 विशेषज्ञों की राय: पूरे राज्य के लिए मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की वैज्ञानिक निर्जलीकरण प्रणालियाँ राज्य के अन्य महुआ एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से स्थापित की जाएँ, तो:

  • ❌ अपव्यय में कमी आएगी

  • ✅ खाद्य-ग्रेड उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी

  • 💼 आदिवासी समुदायों की आजीविका सुदृढ़ होगी

जशपुर में संचालित यह पहल छत्तीसगढ़ में वन-आधारित मूल्य संवर्धन और नवाचार की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।



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