घाटों की खतरनाक राह खत्म… 4 घंटे में पहुंचेगा सफर, खुलने वाला है विकास का गुप्त दरवाजा

छत्तीसगढ़ April 20, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
घाटों की खतरनाक राह खत्म… 4 घंटे में पहुंचेगा सफर, खुलने वाला है विकास का गुप्त दरवाजा

घाटों की खतरनाक राह खत्म… 4 घंटे में पहुंचेगा सफर, खुलने वाला है विकास का गुप्त दरवाजा


रायपुर। सालों से दुर्गम पहाड़ियों और लंबे सफर में उलझे बस्तर के लिए अब एक ऐसी राह तैयार हो रही है, जो न सिर्फ दूरी घटाएगी बल्कि विकास के नए दरवाजे भी खोल सकती है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने की ओर इशारा कर रहे हैं।

भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर छत्तीसगढ़ को सीधे समुद्री बंदरगाह से जोड़ने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अभी तक जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक का सफर ओडिशा के कोरापुट और जयपुर के कठिन घाटों से होकर गुजरता है, जिसमें 7 से 9 घंटे का समय लगता है। लेकिन नया कॉरिडोर तैयार होने के बाद यही दूरी घटकर महज 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी।

यह बदलाव सिर्फ समय की बचत तक सीमित नहीं रहेगा। सीधा और घाट-मुक्त रास्ता होने से वाहनों का संचालन आसान होगा, डीजल खर्च कम होगा और ट्रांसपोर्ट लागत में बड़ी गिरावट आएगी। इससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

कॉरिडोर का सबसे अहम कनेक्शन ओडिशा के नबरंगपुर में बनने वाला इंटरचेंज होगा, जो बस्तर के लिए प्रवेश द्वार की तरह काम करेगा। जगदलपुर से महज 50-60 किलोमीटर की दूरी तय कर वाहन इस इंटरचेंज के जरिए सीधे इकोनॉमिक कॉरिडोर में शामिल हो सकेंगे। इससे बस्तर का सीधा जुड़ाव विशाखापट्टनम पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय बाजार से हो जाएगा।

इसका असर बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा दिखेगा। यहां की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और पारंपरिक ढोकरा शिल्प को अब आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। कम लागत और तेज परिवहन के कारण इन उत्पादों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है, जिससे किसानों और शिल्पकारों की आय में बढ़ोतरी होगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देगा और बस्तर जैसे लैंड-लॉक्ड क्षेत्र को वैश्विक व्यापार से जोड़ेगा। अनुमान है कि यह प्रोजेक्ट इसी साल के अंत तक तैयार हो सकता है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि जब यह कॉरिडोर पूरी तरह शुरू होगा, तो क्या सच में बस्तर की किस्मत बदल जाएगी, या फिर इस बड़े बदलाव के पीछे और भी कई चुनौतियां सामने आएंगी।

 

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