रायगढ़/ नवापारा :- छाल एसईसीएल खुली खदान में विगत 27 मार्च को एसईसीएल की ओबी ठेका कंपनी राम कृपाल सिंह कंट्रक्शन कैंपस में समय पर उपचार करने लेजाने हेतु संसाधन नहीं मिलने से श्रमिक करन पासवान जो पीसी हेल्फर का कार्य करता था उसकी पेट दर्द होने की वजह से मौत हो गई थी। अगर समय पर ठेका कंपनी के कर्मचारियों द्वारा एसईसीएल के ही हॉस्पिटल या फिर एम्बुलेंस की सुविधा दे दी जाती तो आज करन पासवान जिंदा होता पर इसके मौत के पीछे स्पष्ट रूप से ठेका कंपनी आर.के.एस. अपने कर्मचारियों के प्रति लापरवाही दिख रही है।





सैकड़ों वर्कर के लिए नहीं कोई स्वास्थ्य को लेकर इमर्जेंसी सुविधा
रामकृपाल सिंह कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड जो कि छाल खुली खदान में मिट्टी हटाने (ओबी) का काम करती है कंपनी के पास सैकड़ों की तादात में वर्कर कार्य करते है वही कैंपस परिसर में भी 300 से 400 श्रमिक ओर कर्मचारी निवास करते है पर इतने दुर्भाग्य की बात है कि कंपनी द्वारा प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है ना ही इमर्जेंसी के लिए संसाधन। क्या कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं है श्रमिको की स्वास्थ्य को लेकर
आपको बतादे की मौत की घटना के बाद कंपनी अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए मृतक के शव को छाल से खरसिया हॉस्पिटल लेजाया गया जिससे कि मृतक के परिजन या और कोई कंपनी पर आरोप ना लगा सके वही ठेका कंपनी द्वारा एसईसीएल प्रबंधन को भी घटना की जानकारी नहीं दी गई जिससे कि स्पष्ट होता है कि कंपनी किस तरह से पूरा मामला को दबाने की कोशिश में लगा हुआ था। वही जब स्थानीय पत्रकारों को घटना को जानकारी हुई तो मामला खुलकर सामने आया।
परिजनों को हॉस्पिटल से ही शव लेकर कर दिया रवाना, नहीं आने दिया कैंपस
जब मृतक करन पासवान के परिजन खरसिया हॉस्पिटल पहुंचे तो कंपनी के छोटे कर्मचारियों मृतक के परिजनों को कंपनी के कैंपस आने नहीं दिया गया वही कोई कुछ समझ पाते उससे पहले है 1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपए) मृतक के परिजनों को देकर कई कोरे पेपर में दस्तखत करा लिया गया, परिजनों द्वारा कितना कंपनसेशन बनेगा कोई भी जानकारी देने से बचते रहे वही बार बार परिजनों को शव को लेकर जाने की बात कहने लगे, जो कि मृतक के परिजनों में कंपनी के प्रति कई प्रकार से शंका जाहिर कर रहे है ।
विकाश पासवान (मृतक का परिजन) – हम लोग जब खरसिया हॉस्पिटल पहुंचे तो हमें किसी से बात करने नहीं दे रहे थे कंपनी वाले वही दो- तीन कोरे कागजों में दस्तखत भी करा लिया गया है विरोध करने पर हमपर दबाव बनाया जा रहा था बस 1,50,000 रुपए सांत्वना के रूप में दिया गया है बाकी आगे क्या मिलेगा कोई जानकारी नहीं दे रहे रामकृपाल सिंह कंट्रक्शन कंपनी के लोग ना ही हमसे कोई बात किया हमलोग दूसरे राज्य से होने की वजह से हमपर बहुत दबाव बनाया गया।
