क्या है समीकरण और क्या कहते हैं आंकड़े, भाजपा का बस एक दांव और हो जायेगा
रायगढ़ टॉप न्यूज 8 अगस्त 2023। नगर निगम में हालांकि शुरू से घमासान रहा है। गुटबाजी और खींचतान नगर निगम की राजनीति का हिस्सा है। 2020 के नगर निगम में नई शहर सरकार के गठन के बाद इसमें और विस्तार देखा गया। कांग्रेस के पार्षद ही दो धड़ों में अलग अलग दिखाई देने लगे।





ऐसे में अब भाजपा ने महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा ने यह कदम देर से उठाया, फिर भी भाजपा अपनी जीत के प्रति आशान्वित है। नगर निगम में कांग्रेस की महापौर, उन्हीं का सभापति, 27 पार्षद, एमआईसी है लेकिन वहां से खींचतान की खबरें भी हमेशा आती रही है। अभी दो दिन पहले ही नगर निगम के एमआईसी सद्स्य संजय देवांगन ने एमआईसी से महापौर पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। इनका आरोप है कि महापौर एमआईसी में लिए गए निर्णयों का सम्मान नहीं करती बल्कि अधिकारियों के प्रति नरम रुख का प्रदर्शन करते रहती हैं।
5 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान कर दिया है जिसके लिए पार्षद अशोक यादव और भाजपा नेता बबल पाण्डेय को प्रभारी बनाया गया है। भाजपा के पास फिलहाल 21 पार्षद हैं। अविश्वास प्रस्ताव के लिए मात्र एक तिहाई पार्षदों की आवश्यकता होती है। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पास होने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ती है। ऐसे में भाजपा को 32 पार्षदों की जरूरत होगी यानी 11 और पार्षद उन्हें चाहिए।
अविश्वास प्रस्ताव के नियम
नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस कलेक्टर को सदन के कुल सदस्यों के एक तिहाई पार्षद दे सकते हैं। उसके बाद सभा बुलाने का समय तय किया जाएगा। बैठक में काम से कम आधे से ज्यादा यानी 24 पार्षदों की उपस्थिति जरूरी है। उपस्थित पार्षदों के दो तिहाई बहुमत जिस तरफ होगा, मतलब अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में उसकी जीत होगी।
नगर निगम की स्थिति
कुल पार्षदों की संख्या- 48
रिक्त वार्ड की संख्या-01
कांग्रेस पार्षदों की संख्या-26
भाजपा पार्षदों की संख्या-21
अविश्वास मत पास होने के लिए 32 पार्षद भाजपा के पक्ष में होने चाहिए यानि वर्तमान पार्षदों से 11 अधिक पार्षद। कांग्रेस के पार्षदों के बारे में कहा जाता है कि वे 16 और 10 की संख्या में अलग -अलग गुटों में विभक्त हैं। डेकोरम पूरा करने के लिए सामान्य सभा में 24 पार्षदों की उपस्थिति अनिवार्य है।
क्या होगा भाजपा का दांव
यदि भाजपा को अविश्वास प्रस्ताव पास कराना हो तो उन्हें 32 पार्षदों की जरूरत होगी यदि सभी पार्षद उपस्थित रहें तब। वैसे अविश्वास प्रस्ताव के दौरान आधे से अधिक पार्षदों को उपस्थित होना जरूरी है यानि काम से कम 24 पार्षद होने चाहिए।
भाजपा नेताओं के बोल
भाजपा नेता पंकज कंकरवाल ने मुनादी से कहा कि नगर निगम और महापौर के कार्यशैली से आम लोगों के अलावा कांग्रेस के पार्षद भी त्रस्त हैं, वे भी इस अविश्वास प्रस्ताव में साथ दे सकते हैं क्योंकि उन्हें भी अंततः जनता के पास जाना है और जनता को जवाब देना है।
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष पूनम सोलंकी ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में न विकास है न ही कोई काम हो रहे हैं। आम लोग नगर निगम के काम से त्रस्त हैं। महापौर पर सिर्फ भाजपा का ही नहीं पूरे शहर को ही अविश्वास हो गया है। जो भी अपने शहर से प्रेम करता होगा वो अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में होगा।
इस मसले पर कांग्रेस नेताओं की राय
एमआईसी से इस्तीफा दे चुके पार्षद संजय देवांगन ने मुनादी से कहा कि निश्चित रूप से महापौर से मेरी असहमति है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं भाजपा के साथ हो जाऊंगा। मैं संगठन का आदमी हूं और कांग्रेस के ही साथ रहूंगा। भाजपा के पास अविश्वास प्रस्ताव के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है।
इस मामले पर निगम के सभापति जयंत ठेठवार ने कहा उनके पास न संख्या है न ही बल है। इसकी प्रक्रिया के लिए नियम बने हुए हैं। कम से कम दो तिहाई बहुमत चाहिए जो भाजपा के पास नहीं है। ऐसे में इस प्रस्ताव का शिगूफा चुनाव के समय सिर्फ ध्यान खींचने के लिए ही है।
