




रायगढ़/ तमनार। तमनार के करवाही ये में हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में एक नं भव्य हास्य कवि सम्मेलन का ने आयोजन किया गया। यह में कार्यक्रम स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने और लोगों का व मनोरंजन करने के उद्देश्य से र्व आयोजित किया गया था। सम्मेलन में देश के सुप्रसिद्ध ने कवियों ने अपनी हास्य और व्यंग्य ने रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता रही पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की प्रस्तुति। उनकी हास्य और व्यंग्य से भरपूर कविताओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। र न कने से उन्होंने समाज, राजनीति और आम जीवन से जुड़ी घटनाओं को अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया, जिससे श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं और ठहाके लगाए। उनके अलावा अन्य प्रसिद्ध कवियों में तेज राम नायक ने अपने हास्य व्यंग्य रचनाओं से कार्यक्रम को शानदार शुरुआत देते हुए कहा कि राम जैसा राज यहाँ चाहते हैं सभी किन्तु राम जैसा वनवास कोई नहीं चाहता, इसके बाद हरेंद्र ड नसेना ने अपनी ओजमयी प्रस्तुति से कार्यक्रम को गति दिया, गीतकार अजय पटनायक ने अपने प्रस्तुति से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया इसके बाद वीर रस के कवि गुलशन खम्हारी ने अपनी प्रस्तुति से पूरा माहौल में देश भक्ति का रंग भर दिया श्रृंगार कवियत्री सोमप्रभा तिवारी नूर ने कार्यक्रम में श्रोताओं से भरपूर तालियां बटोरी उसके • बाद शरद यादव ने अपने चुटिले अंदाज में कार्यक्रम को बेहतरीन दिशा दिया। इसके साथ ही पूरे कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री ड़ॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपने एक अलग ही अंदाज के साथ दर्शकों से बहुत सारी बटोरी और अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उन्होंने न केवल हास्य बल्कि गंभीर सामाजिक विषयों को भी अपने व्यंग्य के माध्यम से छुआ, जिससे श्रोता सोचने पर भी मजबूर हो गए।
कवियों ने अपने अनोखे अंदाज में कविता पाठ करते हुए दर्शकों को पूरी तरह से सम्मोहित कर लिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से समस्त कवियों को साल, श्रीफल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन, गणमान्य नागरिकों और साहित्य प्रेमियों की भी उपस्थिति रही। मंच को भव्य रूप से सजाया गया था, और पूरे आयोजन के दौरान दर्शकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। इस कवि सम्मेलन ने लोगों को न केवल मनोरंजन का अवसर दिया बल्कि हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज में व्याप्त विभिन्न समस्याओं पर भी विचार करने के लिए प्रेरित किया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी सहयोगियों, कवियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। इस सफल आयोजन ने करवाही को साहित्यिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाया और यह उम्मीद जताई गई कि भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में साहित्य और कला को और अधिक प्रोत्साहन मिले।
