रायगढ़ में गुंजा कला, साहित्य एवं संगीत का महाकुंभ — ‘वेद कला संगीत महोत्सव’देशभर के संगीतज्ञों ने कला गुरु स्व. वेदमणि सिंह ठाकुर ‘बेदम’ को अर्पित की संगीतांजलि

चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय के शताधिक विद्यार्थियों ने गायन, वादन एवं नृत्य की अभिनव प्रस्तुति देकर दादा गुरु को याद किये
रायगढ़। कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर ‘बेदम’ की 91वीं जयंती के पावन अवसर पर 13 मार्च को श्री लक्ष्मण संगीत महाविद्यालय, रायगढ़ द्वारा आयोजित “वेद कला संगीत महोत्सव” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन सेठ किरोड़ीमल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, रायगढ़ के सभागार में तीन सत्रों में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर के संगीतज्ञों एवं कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से स्व. ठाकुर को संगीतांजलि अर्पित की।
महोत्सव के प्रथम सत्र का शुभारंभ रायगढ़ घराने के विख्यात नृत्याचार्य पद्मश्री रामलाल बरेठ, चक्रधर सम्मान से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना सुश्री वासंती वैष्णव, वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुभाष त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार पंडित हरे राम तिवारी, रंगकर्मी श्री युवराज सिंह आजाद, श्री रविन्द्र चौबे, छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री अनुपम पाल, श्री लक्ष्मण संगीत महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती गीता पटेल तथा कला गुरु के वरिष्ठ शिष्यगण श्री जगदीश मेहर एवं श्री मनहरण सिंह ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
इस अवसर पर चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय के शताधिक विद्यार्थियों ने गायन, वादन एवं नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देकर अपने दादा गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा यह सिद्ध किया कि वे इस महान संगीत परंपरा को जीवंत रखते हुए आगे बढ़ाते रहेंगे।
संगीतांजलि के प्रथम चरण में स्व. ठाकुर द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध रचनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें मोक्ष पटेल (राग खमाज), कु. आराध्या कुमारी सिंह (राग वृंदावनी सारंग), कु. पलक प्रधान (राग भीमपलासी) ने एकल शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। वहीं श्रीमती पूजा झरिया एवं श्रीमती संतोष कौर हंसपाल ने सुगम गायन प्रस्तुत किया। समूह गीत “कांकरिया मोहे मार जगाए” को विदिशा कुर्रे, आर्यन पटेल, पूनम चंद्रवंशी, इति गौतम, संचिता साह, रिषित अग्रवाल, नक्षिता देहरी, पलक प्रधान, पूजा झरिया, संतोष कौर हंसपाल एवं चंद्रिका विश्वकर्मा ने समवेत स्वरों में प्रस्तुत कर स्वरांजलि दी।
द्वितीय चरण में तबला वादन कला गुरु का प्रमुख विषय रहा है, उनका अनुशरण करते हुये नन्हे – मुन्ने बच्चों द्वारा तबला वादन की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। गुरु मनीष कुमार के मार्गदर्शन में आराध्य मिश्रा, विनीत साहू, शमी दीक्षित, मोक्ष पटेल, यश देवांगन, दिव्यांश सिंह, सार्थक बोहिदार, अंशु गुप्ता, दीपक नामदेव, रेयांश चौहान, आशुतोष पटनायक, सुब्रत मालाकार, हर्ष चौहान, मिहिर देवांगन, उमेश निर्मलकर, साईं श्रीयानं दास, लोमेश चिन्दा, विनायक एन., देशपांडे एवं दाम्भिक खूंटे ने तीनताल में तबला वादन प्रस्तुत किया। वायलिन पर नन्ही छात्रा सची दीक्षित ने संगत की। तंत्र वाद्य में सिंथेसाइज़र पर राशि साहू, दीपांशु प्रसाद एवं रवि कुमार कश्यप ने मधुर सामूहिक प्रस्तुति दी।
प्रथम सत्र के तृतीय चरण में कथक नृत्य की सजीव प्रस्तुतियां हुईं। प्रवेशिका वर्ग के विद्यार्थियों — अक्षा बेहरा, जान्हवी राठिया, वेदिका तिवारी, इप्शिता श्री, अर्पिता रंजन, सानवी रानी, सानवी राज, आरवी पटेल, वंशिका झरिया, आरवी चंद्रवंशी, जिज्ञासा एन सारथी, शताक्षी एन सारथी, आराध्या सिन्हा, युवराज्ञी बरेठ — ने नृत्य प्रस्तुत किया।
प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों — आराध्या पटेल, गार्गी तिवारी, नियति सेठ, दिया श्रीवास, सुहानी गुप्ता, ईशा गुप्ता, तान्या शेष, विधि शेष, समीक्षा गुप्ता, अंजली एक्का, मान्यता जगवानी, दिशा बेज लकरा, छकुली महेश कुर्वे, आन्वी देवांगन — ने मनमोहक प्रस्तुति दी।
द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों — योगिता पटेल, काम्या विश्वकर्मा, प्राची सारथी, अपर्णा गुप्ता, इशिका सरकार, ऋतु तिवारी, जान्हवी प्रसाद, अवनि कोका, आराध्या चौधरी — तथा तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम वर्ष के विद्यार्थियों — अद्विका देवांगन, अंकृति मिरी, शुभ्रा पांडे, काव्या पटेल, तमन्ना बिश्वास, आकांक्षा तिवारी, तेजी पैंकरा, सोनिया देवांगन, दान्या देवांगन, सुषमा चौहान, परिणिति शर्मा, शाम्भवी सिंह राणा एवं आद्या चौधरी — ने नृत्यांजलि अर्पित की।
महोत्सव के अंतिम सत्र में रायगढ़ के सुप्रसिद्ध कथक नर्तक दिवाकर वाशनिक ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके पश्चात चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय के कथक गुरु काजल कौशिक जिन्होंने कथक के विभिन्न लयकारी एवं भावों को कला गू ठाकुर जी से प्राप्त किये हैं, शिव वंदना से अपनी प्रस्तुति आरंभ करते हुए उपज, ठाट, आमद, चक्करदार तोड़ा, गज परण, कवित्व, तिहाई, गत निकास तथा बिंदादीन महाराज की ठुमरी “कान्हा मैं तोसे हारी” प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में हारमोनियम पर चंद्रा देवांगन एवं रिषम भट्ट, सिंथेसाइज़र पर उमेश निर्मलकर, पखावज पर देव लाल देवांगन, तबला पर मनीष कुमार एवं दीपक चंद्रा, पढ़ंत में निहारिका यादव एवं काजल कौशिक तथा वायलिन पर राजेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने उत्कृष्ट संगत दी।
कार्यक्रम का संचालन कल्याणी मुखर्जी, मनोज श्रीवास्तव एवं अनिता शर्मा ने किया, जबकि कार्यक्रम संयोजन नैंसी मिश्रा का रहा।
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