बांधवगढ़ से बाघिन लाने की तैयारी : तमोर पिंगला को आबाद करने की कोशिश, यहां के नर ने भी बाहर बना लिया ठिकाना 

छत्तीसगढ़ September 3, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
बांधवगढ़ से बाघिन लाने की तैयारी : तमोर पिंगला को आबाद करने की कोशिश, यहां के नर ने भी बाहर बना लिया ठिकाना 

बांधवगढ़ से बाघिन लाने की तैयारी : तमोर पिंगला को आबाद करने की कोशिश, यहां के नर ने भी बाहर बना लिया ठिकाना 

 

रायपुर। देश का तीसरा सबसे बड़े टाइगर रिजर्व के दर्जा प्राप्त गुरुघासीदास-तमोर पिंगला बदहाल हालत में है। इस टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने बारिश के बाद पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से तीन मादा बाघ ट्रांसलोकेट कर लाया जाएगा। इसके लिए एनटीसीए ने अनुमति दे दी है। बारिश के बाद बाघ को ट्रांसलोकेट कर गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व लाया जाएगा।

 

हालांकि इसमें कई तकनीकी पेंच हैं। गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व के पश्चिम-उत्तर में संजय डुबरी तथा पश्चिम में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सटा हुआ है। पूर्व में झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व है। संजय डुबरी तथा बांधवगढ़ के बाघों का गुरुघासीदास एक बड़ा कॉरिडोर है। इसलिए गुरुघासीदास प्रदेश के संवदेनशील टाइगर रिजर्व में शामिल है।

कीटनाशक देकर हत्या
गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए प्रे-बेस की भारी कमी है। इस कारण बाघ शिकार की तलाश में पालतू मवेशियों का शिकार कर जाते हैं। ऐसे ही दो प्रकरण वर्ष 2022 में आए थे। बाघ द्वारा एक मवेशी का शिकार किए जाने के बाद मवेशी मालिक ने अपने मवेशी में कीटनाशक दवा डालकर बाघ को मार डाला था। इसी तरह से नवंबर 2024 में मवेशी का शिकार करने पर एक ग्रामीण ने बाघ को जहर देकर उसे भी मार डाला था।

40% फील्ड स्टाफ की कमी
गौरतलब है कि, गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व 2829.387 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 2024 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद जिस जरूरी फील्ड स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए थी, उसकी पूर्ति दो साल बाद भी नहीं की गई है। सुरक्षा उपाय भी अपर्याप्त हैं। पुराने सेटअप के अनुसार गुरुघासीदास में 84 वनपाल तथा वनरक्षक के सेटअप की स्वीकृति मिली हुई है। पुराने सेट अप के अनुसार वर्तमान में इस टाइगर रिजर्व में 52 फील्ड स्टाफ है। जितने फील्ड स्टाफ हैं, उनमें से ज्यादातर स्टाफ की ड्यूटी कोर तथा बफर जोन की बजाए मैदानी क्षेत्र में है। ऐसे में बाघों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय है।

रेस्क्यू बाघ का ठिकाना संजय डुबरी
दो वर्ष पूर्व पूर्व नवंबर 2024 में बारनवापारा अभयारण्य से एक बाघ को रेस्क्यू कर गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। बारनवापारा में रेस्क्यू बाघ मेल था। बावजूद इसके उसके संबंध में अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिले हैं। छोड़े गए बाघ का प्रमुख ठिकाना गुरुघासीदास न होकर संजय डुबरी टाइगर रिजर्व बन गया है। उक्त बाघ ज्यादातर समय संजय डुबरी टाइगर रिजर्व में रहता है। संजय-डुबरी टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य है। गुरुघासीदास में उक्त बाघ की कभी-कभार आवाजाही होती है। इसके विपरीत वर्ष 2023 में सुरजपूर के ओड़गी ब्लाक में एक घायल मादा बाघ को जंगल सफारी में उपचार करने के बाद अचानकमार टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। उक्त बाघिन ने शावकों को जन्म दिया। इसके साथ एक मादा शावक व्यस्क होने के बाद हाल के दिनों में तीन शावकों को जन्म दे चुकी है।

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