संसद में ‘महिला आरक्षण’ पर सियासी तूफान… बिल पेश होते ही मचा बवाल, क्या बदलने वाला है पूरा खेल?

देश April 16, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
संसद में ‘महिला आरक्षण’ पर सियासी तूफान… बिल पेश होते ही मचा बवाल, क्या बदलने वाला है पूरा खेल?

संसद में ‘महिला आरक्षण’ पर सियासी तूफान… बिल पेश होते ही मचा बवाल, क्या बदलने वाला है पूरा खेल?

नई दिल्ली।
संसद का माहौल उस वक्त अचानक गरमा गया, जब लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बड़े संशोधन बिल पेश किए गए। जैसे ही ये बिल सदन में रखा गया, विपक्ष ने तीखा विरोध शुरू कर दिया और सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। अब यह मुद्दा सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि देश की राजनीति का बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनता नजर आ रहा है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन अहम संशोधन बिल लोकसभा में पेश किए। इनका मकसद 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पूरी तरह लागू करना है। इसके साथ ही अमित शाह ने भी केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 पेश करने की तैयारी जताई।

लेकिन बिल पेश होते ही विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोल दिया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान को ‘हाईजैक’ करना चाहती है और बिल को वापस लेने की मांग की। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक पिछड़े और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि कुछ बयान देश में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया जारी है और इसमें जातीय आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है।

सरकार की ओर से इस बिल को ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देना देश के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा और इसे लेकर भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है।

सदन में इस अहम मुद्दे पर लंबी बहस तय की गई है। लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा होगी। इस दौरान बीजेपी की ओर से बांसुरी स्वराजकंगना रनौत समेत कई नेता अपनी बात रखेंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह बिल सच में महिलाओं के लिए ऐतिहासिक बदलाव लाएगा, या फिर सियासी टकराव में उलझकर रह जाएगा? देश की नजरें अब संसद पर टिकी हैं, जहां आने वाले घंटे कई बड़े फैसलों की दिशा तय कर सकते हैं।

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