ब्रेकिंग: “15 लाख रुपये पर ससुर–दामाद की जंग… हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला! नामिनी को नहीं मिलेगा मालिकाना हक”
नॉमिनेशन कर्ता को मृतक की जमा राशि का मालिकाना हक नहीं — हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर। कर्मचारियों के बैंक खातों में दर्ज नामिनी को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और साफ निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते में दर्ज नामिनी सिर्फ राशि का अभिरक्षक होता है, मालिक या वारिस नहीं।
यह मामला तब सामने आया जब मृत महिला कर्मचारी के बैंक खाते में जमा 15 लाख रुपये को लेकर उसके ससुर और दामाद दोनों ने दावा किया था। निचली अदालत ने ससुर का दावा सही माना था, जिसके खिलाफ दामाद ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दामाद की याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने हिंदू उत्तराधिकार कानून का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा—
➡️ नामांकन (Nomination) बैंक के लिए प्रशासनिक सुविधा है, कानूनी उत्तराधिकार का अधिकार नहीं देता।
➡️ नामिनी केवल पैसे का “केयरटेकर” है, वारिस नहीं।
इस फैसले के साथ ही 15 लाख रुपये पर चल रहा ससुर और दामाद का विवाद खत्म हो गया और ससुर का दावा मजबूत माना गया।
|
|
|
|
![]() |
![]() |
| ||






