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 27 साल विदेश में रहे, ‘भारत के माथे’ पर लगा खून का दाग: बॉन्डी बीच नरसंहार में पिता-पुत्र ने 15 लोगों को भूना

सिडनी के समुद्र तट पर हनुक्का उत्सव पर हुई आतंकी गोलीबारी में भारत-जन्मे साजिद अकरम और उसके बेटे का हाथ, पीड़ितों में बच्ची और होलोकॉस्ट सर्वाइवर भी शामिल

सिडनी, ऑस्ट्रेलिया – बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर को हनुक्का उत्सव के दौरान हुई भयानक गोलीबारी ने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया। इस नरसंहार के पीछे हैदराबाद में जन्मे 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नवीद अकरम का हाथ होने की पुष्टि ने भारत समेत दुनिया को सकते में डाल दिया।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने इसे ‘इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित यहूदी-विरोधी आतंकवाद’ बताया। साजिद और नवीद ने उच्च शक्ति वाली बंदूकों से समुद्र तट पर जमा हुए यहूदी समुदाय पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें 15 लोग मारे गए और 40 से अधिक घायल हुए। पीड़ितों में 10 वर्षीय बच्ची और एक होलोकॉस्ट सर्वाइवर भी शामिल थे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों ने “अल्लाहू अकबर” चिल्लाते हुए गोलीबारी की। इस दौरान एक बहादुर मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई ने नवीद का हथियार छीनकर उसे रोका, जबकि बुजुर्ग जोड़े ने साजिद को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे भी मारे गए। पुलिस की मुठभेड़ में साजिद की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। नवीद गंभीर रूप से घायल था, लेकिन अब कोमा से बाहर है और आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहा है।

जाँच में पाया गया कि हमलावरों की कार में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और इस्लामिक स्टेट के झंडे मिले। पिता-पुत्र ने नवंबर में एक महीना फिलीपींस में बिताया, जहाँ चरमपंथी हॉटस्पॉट मौजूद हैं, जिससे उनकी तैयारी और प्रेरणा की आशंका बढ़ गई।

साजिद अकरम ने हैदराबाद से बी.कॉम की पढ़ाई की थी और 1998 में विदेश में अवसरों की तलाश में ऑस्ट्रेलिया गए। इसके बाद उन्होंने यूरोपीय मूल की महिला से शादी की और सिडनी के पश्चिमी उपनगरों में बस गए। हैदराबाद में परिवार ने उनकी शादी और कट्टरपंथी मानसिकता के बारे में कभी कोई संकेत नहीं देखा।

तेलंगाना पुलिस ने पुष्टि की कि साजिद के भारत में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। लेकिन उनके इस भयावह कृत्य ने हैदराबाद और पूरे भारत में शोक और सवाल पैदा कर दिए कि कैसे एक सामान्य युवा विदेश में इतना क्रूर राक्षस बन गया



















ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीस ने इसे “शुद्ध बुराई” करार दिया और सख्त कार्रवाई का संकल्प लिया। इज़राइल और अमेरिका सहित विश्व नेताओं ने इसे घृणा से प्रेरित आतंकवाद बताया।

सिडनी में बॉन्डी बीच पवेलियन पर श्रद्धांजलि और फूलों का ढेर लगाया गया, जबकि हैदराबाद में परिवार अविश्वास और दर्द में डूबा है। भारत के लिए यह घटना एक कड़वी और डरावनी याद बनकर रह गई कि उग्रवाद की कोई सीमा नहीं होती और यह उन लोगों को भी प्रभावित कर सकता है जो दशकों पहले देश छोड़ चुके हों।



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