कविता कृष्णमूर्ति की सुरमयी आवाज से गूंजा चक्रधर समारोह, जान कुमार सानू ने बांधा समां
कविता कृष्णमूर्ति की सुरमयी आवाज से गूंजा चक्रधर समारोह, जान कुमार सानू ने बांधा समां
पद्मश्री कविता कृष्णमूर्ति ने यादगार गीतों से जीता दिल, जान सानू की आवाज ने भी बिखेरा संगीत का जादू
रायगढ़। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह की दसवीं एवं अंतिम संगीत संध्या में बुधवार को भारतीय संगीत जगत की दो पीढ़ियों की सुरीली आवाज का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत जान कुमार सानू की प्रस्तुति से हुई, जिसके बाद पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी शानदार गायकी से समां बांध दिया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया।
जान कुमार सानू ने अपनी सुरीली आवाज में लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को संगीत की दुनिया में डुबो दिया। उन्होंने ‘तू मिले दिल खिले’ जैसे लोकप्रिय गीतों की मधुर प्रस्तुति से माहौल को संगीतमय बना दिया। अपनी आवाज के साथ उन्होंने अपने पिता एवं प्रसिद्ध गायक कुमार सानू की संगीत विरासत की झलक भी पेश की।
इसके बाद मंच पर पहुंचीं पद्मश्री कविता कृष्णमूर्ति, जिनकी दमदार और भावपूर्ण आवाज ने पूरे वातावरण को सुरमयी बना दिया। चार दशकों से अधिक लंबे संगीत सफर में भारतीय सिनेमा को हजारों यादगार गीत देने वाली कविता कृष्णमूर्ति ने फिल्मी संगीत, शास्त्रीय, भक्ति और समकालीन संगीत का खूबसूरत संगम प्रस्तुत किया।
उन्होंने ‘बोले चूड़ियां, बोले कंगना’ सहित अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी आवाज में गीतों की भावनात्मक गहराई और शास्त्रीय संगीत की मजबूती ने प्रस्तुति को खास बना दिया।
कविता कृष्णमूर्ति के साथ संगीतकारों की शानदार टीम ने प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। संजय मराठे एवं ओमकार देवस्कर—कीबोर्ड, रिचर्ड मित्रा—गिटार, सुरेश रामनाथन—बास, विजय तांबे—बांसुरी, गिरीश विश्व—ढोलक, प्रसाद कुलकर्णी—ड्रम, संकेत ओक—तबला तथा सुप्रिया भट्टाचार्य—कांगो पर संगत की। परिक्षित कुलकर्णी ने साउंड इंजीनियर के रूप में सहयोग दिया।
कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की अंतिम संगीत संध्या को यादगार बना दिया। सुरों से सजी इस शाम में दर्शक देर तक तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।