चुनाव से पहले पटरियों पर ‘अचानक चमत्कार’… जो ट्रेनें महीनों से लेट थीं, वो कैसे हो गईं राइट टाइम?

छत्तीसगढ़ April 18, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
चुनाव से पहले पटरियों पर ‘अचानक चमत्कार’… जो ट्रेनें महीनों से लेट थीं, वो कैसे हो गईं राइट टाइम?

चुनाव से पहले पटरियों पर ‘अचानक चमत्कार’… जो ट्रेनें महीनों से लेट थीं, वो कैसे हो गईं राइट टाइम?


बिलासपुर। क्या चुनाव आते ही रेलवे की रफ्तार बदल जाती है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिस हावड़ा रूट पर महीनों से लेटलतीफी आम बात बन चुकी थी, वहीं अब अचानक सब कुछ समय पर चलने लगा है। इस बदलाव ने यात्रियों के साथ-साथ जानकारों को भी हैरान कर दिया है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव से ठीक पहले रेलवे ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देशभर में फैले बंगाल के वोटरों को समय पर अपने घर पहुंचाने के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का जाल बिछा दिया है। बिलासपुर रूट से होकर करीब 16 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन ट्रेनों को कभी घंटों लेट चलने के लिए जाना जाता था, वे अब बीते एक हफ्ते से राइट टाइम पर दौड़ रही हैं। इसे सीधे तौर पर 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से जोड़कर देखा जा रहा है।

रेलवे ने खासतौर पर उन शहरों और रूट्स को टारगेट किया है, जहां बंगाल के श्रमिक और मध्यम वर्गीय वोटर बड़ी संख्या में रहते हैं। पुणे, एलटीटी, वलसाड जैसे शहरों से संतरागाछी और खड़गपुर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, ताकि दूर-दराज में रहने वाले लोग आसानी से अपने मतदान केंद्र तक पहुंच सकें।

इतना ही नहीं, शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस, जिसे पहले 24 अप्रैल तक रद्द कर दिया गया था, उसे भी अचानक बहाल कर दिया गया है। साथ ही शालीमार-इतवारी के बीच नई साप्ताहिक ट्रेन शुरू कर दी गई है, जिससे चुनावी क्षेत्रों तक पहुंच और आसान हो गई है।

पटना-रक्सौल कॉरिडोर में भी स्पेशल ट्रेनों के जरिए मालदा, दिनाजपुर, वीरभूम और हल्दिया जैसे संवेदनशील इलाकों को कवर किया जा रहा है। साफ है कि रेलवे की यह पूरी रणनीति वोटरों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

अब सवाल यह उठता है कि अगर ट्रेनें चुनाव के समय इतनी व्यवस्थित और समय पर चल सकती हैं, तो आम दिनों में ऐसा क्यों नहीं होता? क्या यह सिर्फ चुनावी जरूरत है या फिर सिस्टम में बदलाव की क्षमता पहले से मौजूद थी?

फिलहाल, पटरियों पर दौड़ती ये ‘स्पेशल रफ्तार’ कई सवाल छोड़ गई है—जवाब शायद चुनाव खत्म होने के बाद ही सामने आएंगे।

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