Delhi Blast EXPOSED: कमरा नंबर 4 और 13 में चल रही थी आतंकी साजिश—अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सीक्रेट मीटिंग का डरावना राज

देश November 13, 2025 रिपोर्टर: raigarh top news
Delhi Blast EXPOSED: कमरा नंबर 4 और 13 में चल रही थी आतंकी साजिश—अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सीक्रेट मीटिंग का डरावना राज

Delhi Blast EXPOSED: कमरा नंबर 4 और 13 में चल रही थी आतंकी साजिश—अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सीक्रेट मीटिंग का डरावना राज

नई दिल्ली। दिल्ली कार धमाके के बाद जांच की नजर अब ‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ और अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर है। यही यूनिवर्सिटी है, जहां से कई डॉक्टर पकड़े गए और आतंकियों की सीक्रेट मीटिंग का राज उजागर हुआ है।

कमरा नंबर 4 और 13 का रहस्य:

  • बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में पकड़ा गया आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई और अन्य आतंकी डॉक्टर मिलकर दिल्ली समेत यूपी के कई ठिकानों में बम धमाके की साजिश रचते थे।

  • वहीं, कमरा नंबर 4 में डॉक्टर उमर की मौजूदगी और मीटिंग्स होती थीं। यही दोनों कमरे आतंकियों की रणनीति और रासायनिक पदार्थों के लेन-देन का मुख्य केंद्र थे।

पुलिस को रेड में क्या मिला:

  • कमरे से कई डिवाइस, पैन ड्राइव और डायरी बरामद हुई हैं।

  • यूनिवर्सिटी की लैब से कैमिकल्स को फरीदाबाद के धौज और टागा गांव में ले जाने की योजना इसी यूनिट से बनाई गई।

  • फोरेंसिक टीम ने कमरे और लैब से रासायनिक पदार्थ बरामद किए, जिनमें अमोनियम नाइट्रेट और ऑक्साइड शामिल थे, जिन्हें मिलाकर विस्फोटक बनाया जा सकता था।

डायरी और नोटबुक का राज:

  • सुरक्षा एजेंसियों को डॉक्टर उमर के रूम नंबर 4 और मुजम्मिल के रूम नंबर 13 से डायरी मिली।

  • डायरी में कोड वर्ड्स और 25-30 लोगों के नाम दर्ज थे, जिनमें ज्यादातर लोग जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के आसपास के निवासी थे।

  • डायरी के अनुसार, आरोपी 8 से 12 नवंबर के बीच कोई बड़ा हमला करने की योजना में थे। डायरी में “ऑपरेशन” शब्द कई बार इस्तेमाल हुआ है।

  • मुजम्मिल के कमरे से पुलिस ने धौज में 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की थी।

विशेषज्ञों की चिंता:
इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यूनिवर्सिटी जैसी जगह से आतंकी नेटवर्क की योजना बनाना दर्शाता है कि आतंकियों ने बड़े हमलों के लिए शैक्षणिक संस्थानों को कवर के रूप में इस्तेमाल किया।

दिल्ली धमाके और अल-फलाह यूनिवर्सिटी की जांच अब तेज़ हो गई है। यह डायरी और डिजिटल डेटा, आतंकियों की पूरी साजिश और अन्य संभावित ठिकानों का पर्दाफाश कर सकते हैं।

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