मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अभिनेता मनोज कुमार के निधन पर जताया शोक, ‘भारत कुमार’ नाम से थे मशहूर

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रायपुर, 04 अप्रैल 2025। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय सिनेमा के सुप्रसिद्ध अभिनेता मनोज कुमार जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मनोज कुमार के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।













 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्वीट करते हुए कहा- भारतीय सिनेमा के सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री मनोज कुमार जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। देशभक्ति फिल्मों के माध्यम से उन्होंने ‘भारत कुमार’ के रूप में पहचान बनाई। उनका योगदान न केवल सिनेमा को, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना को भी समर्पित रहा। जब-जब देशभक्ति फिल्मों की बात होगी, मनोज कुमार जी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। प्रभु श्रीराम दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।

भारतीय अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनका 87 साल की उम्र में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया है. मनोज कुमार के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है. तमाम फैंस और सेलेब्स दिग्गज अभिनेता के निधन पर दुख जाहिर कर रहे हैं.

87 साल की उम्र में मनोज कुमार का निधन
मनोज कुमार कई दिनों से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे. शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. मनोज कुमार को उनकी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाता था. वे बॉलीवुड के ‘भारत कुमार’ के नाम से फेमस थे.

अशोक पंडित ने मनोज कुमार को दी श्रद्धांजलि
भारतीय अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार के निधन पर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा, “…महान दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता, हमारे प्रेरणास्रोत और भारतीय फिल्म उद्योग के ‘शेर’ मनोज कुमार जी अब हमारे बीच नहीं रहे…यह उद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है और पूरी इंडस्ट्री उन्हें याद करेगी…”

देशभक्ति की फिल्मों की वजह से कहे जाते थे ‘भारत कुमार’
24 जुलाई, 1937 को हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी के रूप में जन्मे मनोज कुमार हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता थे. उन्हें देशभक्ति थीम वाली फ़िल्मों में अभिनय और निर्देशन के लिए जाना जाता था.जिसमें “शहीद” (1965), “उपकार” (1967), “पूरब और पश्चिम” (1970), और “रोटी कपड़ा और मकान” (1974) शामिल हैं. इन फिल्मों की वजह से ही उन्हें ‘भारत कुमार’ भी कहा जाता था.

अपनी देशभक्ति फिल्मों के अलावा, उन्होंने “हरियाली और रास्ता”, “वो कौन थी”, “हिमालय की गोद में”, “दो बदन”, “पत्थर के सनम”, “नील कमल” और “क्रांति” जैसी अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में भी अभिनय और निर्देशन किया. वे आखिरी बार बड़े पर्दे पर 1995 में आई फिल्म ‘मैदान-ए-जंग’ में नजर आए थे.

पुरस्कार और सम्मान
भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए मनोज कुमार को 1992 में पद्म श्री और 2015 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.





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