छत्तीसगढ़ महतारी सबकी है: सुभाष मिश्र की चेतावनी – अस्मिता को नफरत का औज़ार न बनाएं

छत्तीसगढ़ November 7, 2025 • रिपोर्टर: raigarh top news
छत्तीसगढ़ महतारी सबकी है: सुभाष मिश्र की चेतावनी – अस्मिता को नफरत का औज़ार न बनाएं

छत्तीसगढ़ महतारी सबकी है: सुभाष मिश्र की चेतावनी – अस्मिता को नफरत का औज़ार न बनाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ इन दिनों अस्मिता और राजनीतिक विवादों के बीच उलझा हुआ है। छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने और उसके बाद दिए गए विवादित बयानों ने पूरे प्रदेश में आक्रोश और सामाजिक तनाव को जन्म दिया है।

सुभाष मिश्र, Editor-in-Chief ने अपनी कलम से लिखा है कि यह केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहराई का संकेत है जहां स्थानीय अस्मिता और राजनीतिक स्वार्थ एक-दूसरे में उलझते जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अस्मिता को नफरत का औज़ार नहीं बनने देना चाहिए।

विवाद की शुरुआत और प्रतिक्रियाएं

विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय नेता अमित बघेल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अग्रसेन महाराज जैसे व्यक्तित्वों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की।
उनके बयान से समाज की साझा विरासत और एकता को ठेस पहुँची।

इस पर अग्रवाल समाज की प्रीति अग्रवाल ने कहा कि यह समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश है।
सिंधी समाज के सलाहकार अमित चिमनानी ने भी कहा कि सिंधी समाज हर संकट में छत्तीसगढ़ के साथ खड़ा रहा है, और छत्तीसगढ़ महतारी सभी की मां है।

अस्मिता का असली अर्थ

सुभाष मिश्र का मानना है कि अस्मिता केवल क्षेत्रीय पहचान नहीं है, बल्कि सभी के लिए साझा विरासत है। स्थानीयता और संस्कृति गौरव की पहचान हो सकती है, लेकिन अगर यह नफरत और बहिष्कार का रूप ले ले, तो यह समाज को बांट देती है।

उन्होंने लिखा है कि छत्तीसगढ़ जैसी युवा भूमि को गर्व होना चाहिए कि हर समाज, हर समुदाय ने विकास और समरसता में योगदान दिया है।

“अस्मिता का सम्मान तभी सार्थक होगा जब उसमें सबके लिए जगह होगी। स्थानीयता की शक्ति तब तक उपयोगी है जब तक वह दूसरों के प्रति नफरत का रूप न ले ले।”

सार संदेश

सुभाष मिश्र ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ महतारी सबकी मां है। किसी समाज, भाषा या धर्म के आधार पर बहिष्कार अस्वीकार्य है।
आज जरूरत है अस्मिता के सम्मान की, राजनीति की नहीं।
प्रदेश को अपनी असली पहचान विविधता में एकता और समरसता बनाए रखनी होगी।

⚠️ चेतावनी: अस्मिता को कभी भी नफरत या विभाजन का औज़ार नहीं बनाना चाहिए।

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