नहीं रहीं पंडवानी की अमर आवाज… पद्म विभूषण तीजन बाई ने ली अंतिम सांस, शोक में डूबा पूरा देश

छत्तीसगढ़ July 5, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
नहीं रहीं पंडवानी की अमर आवाज… पद्म विभूषण तीजन बाई ने ली अंतिम सांस, शोक में डूबा पूरा देश

नहीं रहीं पंडवानी की अमर आवाज… पद्म विभूषण तीजन बाई ने ली अंतिम सांस, शोक में डूबा पूरा देश

नहीं रहीं पंडवानी की अमर आवाज… पद्म विभूषण तीजन बाई ने ली अंतिम सांस, शोक में डूबा पूरा देश

छत्तीसगढ़ ने खो दिया अपना सांस्कृतिक सितारा! पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, लोककला जगत में शोक की लहर

जिस आवाज़ ने महाभारत को दुनिया तक पहुंचाया… वह हमेशा के लिए खामोश हो गई, तीजन बाई का निधन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति के लिए रविवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। विश्वभर में पंडवानी गायन को नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रसिद्ध लोक कलाकार तीजन बाई का निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर स्थित एम्स में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश सहित देशभर के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

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तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अद्भुत प्रस्तुति शैली से पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को उन्होंने जिस जीवंत अंदाज में मंच पर प्रस्तुत किया, उसने देश ही नहीं बल्कि एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के अनेक देशों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनकी साधना और समर्पण के कारण छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विशेष सम्मान मिला।

भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. (डॉक्टरेट) की उपाधि भी प्रदान की थी।

तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी अथक साधना से पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर विश्व मंच तक पहुंचाया और लोक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक स्थापित किया। उनके जाने से भारतीय संस्कृति ने अपना एक ऐसा अमूल्य नक्षत्र खो दिया है, जिसकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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