7 साल की फरारी के बाद बड़ा एक्शन! महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, अब भारत वापसी की तैयारी
फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट से ओमान में घुसने का आरोप, इंटरपोल के रेड नोटिस पर रॉयल ओमान पुलिस की कार्रवाई

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महादेव ऐप के कथित संचालक और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि वह फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में दाखिल हुआ था। भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि उसे मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके खिलाफ फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध तरीके से ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। अपनी कानूनी पैरवी के लिए उसने मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कथित हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं।
हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि उसके खिलाफ भारत में राजनीतिक कारणों से मामला दर्ज किया गया है, लेकिन CCF ने माना कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CCF में सुनवाई के दौरान ही सौरभ चंद्राकर UAE छोड़कर ओमान पहुंच गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल प्रत्यर्पण प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का उपयोग गंभीर अपराध है, जिसके लिए 3 से 5 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए पहले भी कई प्रयास किए गए थे। वर्ष 2024 में उसे दुबई में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया। अब ओमान में हुई गिरफ्तारी के बाद उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
नोट: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित जांच एजेंसियों की जानकारी पर आधारित है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।