टोलिंग में तकनीक का नया कदम, फंदा प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियर-फ्री पायलट, फास्टैग अपनाने और तकनीकी अपग्रेड से यात्रियों को मिल रही तेज़ और सुगम यात्रा
टोलिंग में तकनीक का नया कदम, फंदा प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियर-फ्री पायलट, फास्टैग अपनाने और तकनीकी अपग्रेड से यात्रियों को मिल रही तेज़ और सुगम यात्रा
भोपाल- देवास मार्ग पर यात्रियों के टोल अनुभव को अधिक सुगम और तेज बनाने की दिशा में देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड (डीबीसीपीएल) ने फंदा टोल प्लाजा पर बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था का पायलट परीक्षण शुरू किया है। नई व्यवस्था में FASTag और कैमरा आधारित तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की जा रही है, जिससे टोल भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाने और वाहनों को टोल बैरियर पर रुकने की आवश्यकता को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
बिना रुके टोल पार करने की दिशा में पहल
पारंपरिक टोल व्यवस्था में वाहन को टोल लेन में रुकना या धीमा करना पड़ता है, जिससे व्यस्त समय में कतार और प्रतीक्षा की स्थिति बन सकती है। बैरियर-फ्री व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को अधिक सुचारु बनाना है।
फंदा टोल प्लाजा पर चल रहे पायलट में FASTag के साथ कैमरा आधारित वाहन पहचान तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके जरिए वाहन की पहचान और टोल लेन-देन की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। पायलट के दौरान वाहनों को बिना रुके टोल क्षेत्र से गुजरने की सुविधा का परीक्षण किया जा रहा है।
तकनीक से कम होगा रुकने का समय
नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और कतार में खड़े रहने के समय को कम करना है। इससे न केवल यात्रियों की यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है, बल्कि बार-बार ब्रेक लगाने और वाहन को दोबारा गति देने से होने वाली ईंधन खपत को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था में वाहन की पहचान FASTag और कैमरों के माध्यम से की जाती है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया को तेज करने और यातायात के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
FASTag आधारित डिजिटल टोलिंग को बढ़ावा
इस पहल के जरिए FASTag आधारित डिजिटल टोलिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। टोल भुगतान में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से नकद लेन-देन पर निर्भरता कम होती है और टोल संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है।
पायलट के दौरान तकनीकी प्रक्रिया, वाहन पहचान और टोल लेन-देन के संचालन का परीक्षण किया जा रहा है। यदि किसी वाहन के FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या तकनीकी समस्या आती है, तो ऐसी स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ई-चालान प्रक्रिया का भी प्रावधान किया जा रहा है।
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर
डीबीसीपीएल की इस पहल का फोकस केवल टोल भुगतान को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों के पूरे यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने पर है। टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने से पीक आवर्स में बनने वाली कतारों और अनावश्यक रुकावटों को कम करने में मदद मिल सकती है।
फंदा टोल प्लाजा पर पायलट के परिणामों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर भविष्य में इस तरह की तकनीक को कॉरिडोर के अन्य टोल प्लाजा पर लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
आगे तकनीक के विस्तार की संभावना
डीबीसीपीएल द्वारा प्रबंधित भोपाल-देवास कॉरिडोर पर फंदा के अलावा अमलाहा और भौरासा टोल प्लाजा भी हैं। फंदा टोल प्लाजा पर शुरू किया गया पायलट सफल रहने पर बैरियर-फ्री और तकनीक आधारित टोलिंग व्यवस्था के विस्तार की संभावना बन सकती है।
इस पहल से भविष्य में टोल प्लाजा पर यात्रा के समय को कम करने, ईंधन की बचत करने और वाहनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह कदम सड़क अवसंरचना में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और यात्रियों को बेहतर सेवा देने की दिशा में डीबीसीपीएल की पहल को दर्शाता है।