हर महीने के 1000 रुपये ने बदली तस्वीर, छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर; 13.85 लाख पहुंचीं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में
हर महीने के 1000 रुपये ने बदली तस्वीर, छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर; 13.85 लाख पहुंचीं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में
हर महीने के 1000 रुपये ने बदली तस्वीर, छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर; 13.85 लाख पहुंचीं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में
महतारी वंदन योजना से 68 लाख महिलाओं को मिल रहा लाभ, 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से ज्यादा जारी; छोटे कारोबार के लिए बिना गारंटी ऋण भी बना सहारा
रायपुर, 20 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संचालित महतारी वंदन योजना कई महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और छोटे कारोबार का आधार बन रही है। योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि का इस्तेमाल महिलाएं घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अपने छोटे व्यवसाय में भी कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों, बैंक ऋण और स्वरोजगार के अवसरों के साथ मिलकर यह सहायता महिलाओं की आजीविका को बढ़ाने में योगदान दे रही है।
68 लाख महिलाओं को मिल रहा योजना का लाभ
महतारी वंदन योजना के तहत राज्य में करीब 68 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
योजना के साथ महतारी शक्ति ऋण योजना को भी जोड़ा गया है। इसके तहत नवंबर 2024 से अब तक करीब 41,124 लाभार्थियों ने बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण का लाभ उठाया है। इन ऋणों की कुल राशि 102.38 करोड़ रुपये बताई गई है।
सब्जी से लेकर सिलाई और मुर्गी पालन तक कारोबार
सरकारी जानकारी के मुताबिक, योजना और ऋण की सहायता से महिलाएं अलग-अलग छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इनमें सब्जी बिक्री, सिलाई, किराना दुकान, कारीगरी, मुर्गी पालन और हैचरी जैसे काम शामिल हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के आंदी गांव की रानू कैवर्त सिलाई, कपड़े और किराने के कारोबार के साथ बटेर और देसी मुर्गी पालन तथा हैचरी का काम कर रही हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार उनकी सालाना आमदनी करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
किसी ने किराना दुकान बढ़ाई, तो किसी ने शुरू किया मुर्गी पालन
गुडुमदेवारी की सीता मरावी ने किराना दुकान के लिए बैंक से 25 हजार रुपये और मुर्गी पालन के लिए स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे उनकी सालाना कमाई करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई।
इसी गांव की सुमन लता वाकरे ने स्वयं सहायता समूह से 15 हजार रुपये लेकर किराना दुकान शुरू की। बाद में बैंक ऋण की मदद से कारोबार का विस्तार किया और अब उनकी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के रामगढ़ की केजू बाई सलामे महतारी वंदन योजना से मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि का इस्तेमाल किराना दुकान के लिए सामान का स्टॉक बढ़ाने में करती हैं। इससे बिक्री बढ़ने और आय में सुधार होने की जानकारी दी गई है।
13.85 लाख महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 13.85 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में महतारी वंदन योजना की शुरुआत की गई थी।
योजना के जरिए महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
लखपति दीदियों को देश के आर्थिक केंद्रों के भ्रमण का मौका
राज्य सरकार ने लखपति दीदी भ्रमण योजना के लिए भी बजटीय प्रावधान किया है। इसके तहत लखपति दीदियों को देश के विभिन्न व्यापारिक और आर्थिक केंद्रों के साथ प्रमुख शक्तिपीठों का भ्रमण कराने की योजना है।
महतारी वंदन योजना, स्वयं सहायता समूहों और स्वरोजगार ऋण के जरिए महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का यह मॉडल ग्रामीण और घरेलू स्तर पर आय के नए अवसर विकसित करने पर केंद्रित है।