“सम्मान नहीं दे सकते तो बुलाया ही मत करो!”
कुर्मी समाज के मंच से भूपेश बघेल का तीखा विस्फोट, बीच भाषण रोकने पर भड़के पूर्व CM

बालोद।
कुर्मी क्षत्रिय समाज के कार्यक्रम में उस वक्त माहौल अचानक गरमा गया, जब कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंच से ही खुलकर नाराजगी जाहिर करने लगे। गुस्से में उन्होंने दो टूक कहा—
“अगर सम्मान नहीं दे सकते, तो बुलाया ही मत करो।”
उनके इस बयान से पूरे कार्यक्रम में सन्नाटा और राजनीतिक हलचल दोनों देखने को मिली।
🎤 बीच भाषण रोकते ही भड़का गुस्सा
दरअसल, भूपेश बघेल मंच से संबोधित कर रहे थे और किसानों, धान खरीदी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे। तभी मंच पर मौजूद एक पदाधिकारी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि यह सामाजिक कार्यक्रम है, यहां राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।
🔥 “किसान की बात राजनीति कैसे हो गई?”
इस टोके जाने पर भूपेश बघेल भड़क उठे। उन्होंने मंच से ही पलटवार करते हुए कहा—
“किसान के हित की बात में राजनीति कहां से आ गई?”
उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर बैठे दूसरे दल के लोगों को मिर्ची लग रही है, लेकिन वे इस पर चुप नहीं रहेंगे।
बताया जा रहा है कि मंच पर मौजूद भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद मामला और गरमा गया।
📍 वार्षिक सम्मेलन बना सियासी अखाड़ा
यह पूरा घटनाक्रम 18 जनवरी को सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान, बालोद में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के वार्षिक सम्मेलन के दौरान हुआ। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे भूपेश बघेल मंच से भाषण दे रहे थे, तभी यह विवाद खड़ा हो गया।
🌾 धान खरीदी पर सरकार को घेरा
भाषण के दौरान भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि
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धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है
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धान से भरे ट्रकों के गायब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं
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धान उठाव और खरीदी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी है
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सबका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है और अन्नदाता लगातार परेशान है।
👉 सम्मान, मंच और राजनीति—तीनों का टकराव
कुर्मी समाज का यह सामाजिक कार्यक्रम कुछ ही देर में राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। भूपेश बघेल का मंच से भड़कना अब प्रदेश की राजनीति में नई बहस और हलचल को जन्म देता दिख रहा है।
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