राशन लेकर घर लौट रही 15 साल की किशोरी को ट्रेलर ने रौंदा, गुस्से से सड़कों पर उतरे लोग—क्या हर बार मौत के बाद ही जागेगा सिस्टम?

छत्तीसगढ़ April 19, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
राशन लेकर घर लौट रही 15 साल की किशोरी को ट्रेलर ने रौंदा, गुस्से से सड़कों पर उतरे लोग—क्या हर बार मौत के बाद ही जागेगा सिस्टम?

राशन लेकर घर लौट रही 15 साल की किशोरी को ट्रेलर ने रौंदा, गुस्से से सड़कों पर उतरे लोग—क्या हर बार मौत के बाद ही जागेगा सिस्टम?

रायगढ़।
शहर की सड़कों पर अब सिर्फ ट्रैफिक नहीं दौड़ता… यहां हर मोड़ पर मौत घात लगाकर बैठी है। रविवार सुबह एक बार फिर वही खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।

सीएमओ तिराहा—एक ऐसा नाम, जो अब सड़क नहीं बल्कि खून से सना इतिहास बन चुका है। इसी बदनाम चौराहे पर एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने 15 वर्षीय किशोरी को कुचल दिया। वह अपने दादा के साथ स्कूटी पर बैठकर सरकारी राशन दुकान से चावल लेकर घर लौट रही थी। लेकिन घर तक पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें सड़क पर थम गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही स्कूटी सीएमओ तिराहा के पास पहुंची, अचानक पीछे से आए ट्रेलर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि किशोरी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, उसके साथ मौजूद दादा सदमे में बेसुध हो गए—आंखों के सामने पोती को खो देने का दर्द उन्हें अंदर तक तोड़ गया।

बताया जा रहा है कि किशोरी का परिवार कृष्णापुर क्षेत्र में रहता है, जबकि उनका राशन कार्ड भगवानपुर की दुकान से जुड़ा हुआ है। एक सामान्य दिन… एक साधारण सफर… लेकिन किसे पता था कि यही रास्ता उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।

यह पहली बार नहीं है। इसी सीएमओ तिराहा ने करीब 15 साल पहले भी एक स्कूली बच्चे की जान ली थी। उस वक्त भी शहर गुस्से से उबल पड़ा था। वाहनों में तोड़फोड़ हुई, आगजनी हुई और प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे किए थे—सुरक्षा बढ़ाने के, ट्रैफिक सुधारने के, भारी वाहनों पर नियंत्रण के।

लेकिन वक्त बीत गया… वादे धूल में मिल गए… और तिराहा फिर खून से लाल हो गया।

हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुआवजे की मांग, दोषी चालक पर सख्त कार्रवाई और इस खतरनाक चौक पर स्थायी समाधान की मांग को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया। खबर लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी था।

अब सवाल फिर वही खड़े हैं—
कितनी मौतों के बाद जागेगा प्रशासन?
कब तक बेलगाम ट्रेलर और भारी वाहन मासूम जिंदगियों को यूं ही रौंदते रहेंगे?
क्यों हर हादसे के बाद सिर्फ मुआवजे का ऐलान ही समाधान बन जाता है?

रायगढ़ आज फिर रो रहा है।
एक परिवार उजड़ गया… एक घर की हंसी हमेशा के लिए खामोश हो गई।

लेकिन सबसे डरावना सवाल अभी भी जिंदा है—
क्या अगली मौत तक सब कुछ फिर सामान्य मान लिया जाएगा?

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