कंप्यूटर, लैपटॉप पर काम करने वालों के लिए 20,20,20 का नियम, आंखो में होने वाली इन बीमारियों से बच सकते हैं

लाइफस्टाइल & हेल्थ October 9, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
कंप्यूटर, लैपटॉप पर काम करने वालों के लिए 20,20,20 का नियम, आंखो में होने वाली इन बीमारियों से बच सकते हैं

कंप्यूटर, लैपटॉप पर काम करने वालों के लिए 20,20,20 का नियम, आंखो में होने वाली इन बीमारियों से बच सकते हैं

आंखों में नजर से जुड़ी समस्या जब तक नहीं होती, हम रोजाना की दिनचर्या में इन पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में आंखों से जुड़ी समस्याएं जिस तेजी से बढ़ी हैं, बच्चों और युवाओं को अपनी आंखों की खास देखभाल करने की जरूरत है। इससे प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस को रोका जा सकता है। इसके लिए आंखों की नियमित जांच, आंखों के लिए खराब स्थितियों और समय पर सही इलाज की जानकारी जरूरी है।

आंखों की रोशनी बचाने के लिए कुछ आसान लेकिन नियमित आदतें भी जरूरी हैं। युवाओं को नियमित रूप से आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए, भले ही उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस न हो। डॉक्टर महिपाल सिंह सचदेव (चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स) के मुताबिक, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, परिवार में ग्लूकोमा या आंखों से जुड़ी दूसरी बीमारी का इतिहास होने पर ज्यादा नियमित जांच की जरूरत हो सकती है। बच्चों की भी नजर की जांच कराना जरूरी है, खासकर अगर उन्हें बार-बार सिरदर्द होता है, पढ़ने में परेशानी होती है, वे बार-बार आंखें मलते हैं, आंखें सिकोड़कर देखते हैं या स्कूल में बोर्ड देखने में दिक्कत होती है। खेल के दौरान या मशीनरी और केमिकल के साथ काम करते समय सही आई प्रोटेक्शन पहनने से आंखों में होने वाली गंभीर चोटों से बचाव किया जा सकता है।

आंखों के लिए जरूरी 20,20,20 नियम
अगर आप लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते हैं, डिजिटल स्क्रीन पर समय बिताते हैं तो आंखों को आराम देना भी जरूरी है। रोजमर्रा की दिनचर्या में आई केयर को शामिल करना जरूरी है। इसके लिए आप 20-20-20 नियम अपना सकते हैं। इससे डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करने में मदद मिल सकती है। इस नियम में आपको हर 20 मिनट में करीब 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखना होता है। पर्याप्त रोशनी, स्क्रीन को आंखों से सही दूरी पर रखना, बार-बार पलकें झपकाना और पूरी नींद लेना भी आंखों को आराम देने में मदद कर सकता है।

आंखों में होने वाली बीमारी और उनके कारण
प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस की शुरुआत हमेशा किसी गंभीर या साफ दिखाई देने वाली आंखों की बीमारी से नहीं होती। कैटरेक्ट, ग्लूकोमा, डायबिटिक आई डिजीज, नजर का नंबर, कॉर्निया से जुड़ी बीमारियां और रेटिना से जुड़ी कुछ बीमारियां धीरे-धीरे नजर को प्रभावित कर सकती हैं। कैटरेक्ट दुनिया भर में नजर कमजोर होने के ऐसे प्रमुख कारणों में से एक है, जिसका इलाज संभव है। कैटरेक्ट के अलावा ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों में भी समय पर पहचान बेहद जरूरी है। ये बीमारियां लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के बढ़ सकती हैं। ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर नजर को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है, वहीं डायबिटीज रेटिना की नसों को नुकसान पहुंचाकर नजर को कमजोर कर सकती है।

खबर शेयर करें: