वन्दे मातरम्’ को खण्डित करने का कांग्रेस का इतिहास तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण : भाजपा

Uncategorized August 20, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
वन्दे मातरम्’ को खण्डित करने का कांग्रेस का इतिहास तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण : भाजपा

वन्दे मातरम्’ को खण्डित करने का कांग्रेस का इतिहास तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण : भाजपा

*वन्दे मातरम्’ को खण्डित करने का कांग्रेस का इतिहास तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण : भाजपा

*मुख्य प्रदेश प्रवक्ता व सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा : राष्ट्रगीत के प्रति कांग्रेस का संकुचित दृष्टिकोण देश की स्वतंत्रता चेतना का अपमान

*रायपुर।* भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो पदों को ही गाने के प्रस्ताव और उस पर अड़े रहने के रवैये पर तीखा हमला बोला है। श्री पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस का यह दृष्टिकोण उसकी दशकों पुरानी विभाजनकारी और तुष्टीकरण की राजनीति का स्पष्ट प्रमाण है।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता व सांसद श्री पाण्डेय ने कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव को ​​राष्ट्र चेतना का अपमान निरूपित करते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्राण तत्व और राष्ट्रभक्ति का अमर उद्घोष रहा है। इस पावन गीत को टुकड़ों में बाँटने की जिद कांग्रेस के संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ को दर्शाती है। श्री पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा संपूर्ण ‘वन्दे मातरम्’ की जगह केवल दो पदों को स्वीकार करने का प्रस्ताव एक वर्ग विशेष को साधने और वोट बैंक की खातिर राष्ट्रीय भावना के साथ किया गया समझौता था। जिस गीत को गाते हुए अमर शहीदों ने हँसते-हँसते फाँसी के फंदों को चूमा था, उसके मूल भाव और सम्पूर्णता को अस्वीकार करना देश की सांस्कृतिक आत्मा और बलिदानियों की स्मृति पर आघात है। आजादी के आंदोलन से लेकर आज तक कांग्रेस ने सदैव तुष्टीकरण के आगे राष्ट्रभक्ति के प्रतीकों को गौण करने का काम किया है। श्री पाण्डेय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सम्पूर्ण राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ और माँ भारती के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। देश की जनता कांग्रेस की इस विभाजनकारी मानसिकता को भली-भाँति समझ चुकी है और वह राष्ट्र के मान-बिंदुओं से किसी भी प्रकार का समझौता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
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