शतरंज की बिसात पर खामोश तूफान… एक जीत जिसने दुनिया को चौंकाया, अब सबसे खतरनाक मुकाबले की उलटी गिनती शुरू

Uncategorized April 16, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
शतरंज की बिसात पर खामोश तूफान… एक जीत जिसने दुनिया को चौंकाया, अब सबसे खतरनाक मुकाबले की उलटी गिनती शुरू

शतरंज की बिसात पर खामोश तूफान… एक जीत जिसने दुनिया को चौंकाया, अब सबसे खतरनाक मुकाबले की उलटी गिनती शुरू

नई दिल्ली।
शतरंज की शांत दिखने वाली बिसात पर इस बार ऐसा खेल हुआ, जिसने दुनिया भर के दिग्गजों को चौंका दिया। भारत की युवा खिलाड़ी आर वैशाली ने फिडे विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है।

इस ऐतिहासिक जीत के बाद वैशाली अब सीधे विश्व शिखर की ओर बढ़ चुकी हैं, जहां उनका सामना होगा पांच बार की विश्व चैंपियन जू वेनजुन से। जू वेनजुन लंबे समय से महिला शतरंज की सबसे मजबूत और खतरनाक खिलाड़ी मानी जाती हैं। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि दिमाग और धैर्य की सबसे बड़ी जंग बनने जा रहा है।

टूर्नामेंट का आखिरी राउंड किसी थ्रिलर से कम नहीं था। निर्णायक मुकाबले में वैशाली ने जबरदस्त संयम दिखाते हुए कैटरीना लैग्नो को मात दी। वहीं दूसरी ओर दिव्या देशमुख ने बिबिसारा असाउबायेवा को ड्रॉ पर रोककर वैशाली की राह आसान कर दी। अंत में सफेद मोहरों से खेलते हुए वैशाली ने जीत दर्ज की और खिताब अपने नाम कर लिया।

पूरे टूर्नामेंट में 8.5 अंकों के साथ उन्होंने न सिर्फ अपनी काबिलियत साबित की, बल्कि भारतीय महिला शतरंज को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। यह उपलब्धि कहीं न कहीं कोनेरू हम्पी के बाद एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी मानी जा रही है।

चेन्नई में जन्मी वैशाली का सफर भी किसी कहानी से कम नहीं है। महज 6 साल की उम्र में शतरंज की दुनिया में कदम रखने वाली इस खिलाड़ी ने धीरे-धीरे हर स्तर पर अपनी छाप छोड़ी। वुमन ग्रैंडमास्टर, इंटरनेशनल मास्टर और फिर ग्रैंडमास्टर बनने तक का उनका सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है।

इस कहानी का एक और दिलचस्प पहलू है—उनका परिवार। वैशाली के छोटे भाई आर प्रज्ञानानंद भी ग्रैंडमास्टर हैं। दोनों भाई-बहन ने मिलकर इतिहास रचा और भारतीय शतरंज को वैश्विक पहचान दिलाई।

अब सबकी नजरें उस मुकाबले पर टिक गई हैं, जहां वैशाली का सामना जू वेनजुन से होगा। यह सिर्फ एक मैच नहीं होगा, बल्कि वह पल होगा जो तय करेगा कि क्या भारत को महिला शतरंज में एक नया विश्व चैंपियन मिलने वाला है… या फिर अनुभव एक बार फिर युवा जोश पर भारी पड़ेगा।


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