छत्तीसगढ़ में मां-बेटी की हत्या के केस में लिव इन पार्टनर को डबल उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ April 11, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
छत्तीसगढ़ में मां-बेटी की हत्या के केस में लिव इन पार्टनर को डबल उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ में मां-बेटी की हत्या के केस में लिव इन पार्टनर को डबल उम्रकैद की सजा

 

कवर्धा: कबीरधाम जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड (Double Murder Case) में शुक्रवार को अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश गितेश कुमार कौशिक की अदालत ने आरोपी अश्वनी पांडेय को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 201 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और कुल 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य है, लेकिन इसे विरलतम में विरल श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, इसलिए मृत्युदंड देना उचित नहीं है।

2024 में सामने आया था मामला
यह घटना वर्ष 2024 में कवर्धा थाना क्षेत्र में सामने आई थी। एक मकान में वसुंधरा वैष्णव और उनकी पुत्री पार्वती वैष्णव के शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि
दोनों शवों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमॉर्टम में स्पष्ट हुआ कि उनकी मौत गला घोंटने से हुई है। मृतकों के शरीर पर संघर्ष के निशान भी पाए गए, जिससे यह साबित हुआ कि हत्या से पहले उन्होंने विरोध किया था।

प्रेम संबंध और फरारी से बढ़ा शक
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी अश्वनी पांडेय, वसुंधरा वैष्णव के साथ लिव-इन संबंध में रह रहा था। घटना के बाद उसका अचानक गायब हो जाना संदेह को और मजबूत करता गया।

पुलिस ने तकनीकी और साइबर मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक कर रायपुर रेलवे स्टेशन के पास एक होटल से उसे गिरफ्तार किया। उसके पास से स्कूटी भी बरामद की गई।

साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी उजागर

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। घटनास्थल से ताला काटने के औजार, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई, जो मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। अदालत ने इन्हें निर्णायक मानते हुए आरोपी को धारा 201 के तहत भी दोषी ठहराया।

न्याय का संदेश
अदालत ने कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और समाज के लिए गंभीर संदेश देता है। हालांकि इसे दुर्लभतम श्रेणी में नहीं रखा गया।

फैसले के अनुसार, आरोपी 27 फरवरी 2024 से न्यायिक हिरासत में है और यह अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। इस निर्णय के साथ लंबे समय से चर्चित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई और समाज को सख्त संदेश मिला कि गंभीर अपराधों में कानून से बचना संभव नहीं है।

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