सांसद नवीन जिन्दल ने तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाया: कंवलजीत कौर, एक शाम तिरंगे के नाम में फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने कवियों को तिरंगे भेंट किए

राष्ट्रीय ध्वज जागरूकता अभियान के तहत कुरुक्षेत्र में गूंजी देशभक्ति की कविताएं, “एक शाम तिरंगे के नाम” काव्य-संध्या सम्पन्न
कुरुक्षेत्र, 24 जनवरी। सांसद नवीन जिन्दल के मार्गदर्शन में फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित राष्ट्रीय ध्वज जागरूकता अभियान के अंतर्गत कुरुक्षेत्र में आयोजित देशभक्ति काव्य-संध्या “एक शाम तिरंगे के नाम” आज सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी के हॉल में भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। इस कार्यक्रम में जिला परिषद कुरुक्षेत्र की अध्यक्षा कंवलजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन समाज में राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करते हैं और युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज जागरूकता अभियान को समय की आवश्यकता बताते हुए इस पहल की सराहना की। उन्होंने सांसद नवीन जिन्दल की सराहना करते हुए कहा कि सांसद नवीन जिन्दल ने तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाया है। उन्होंने सांसद जिन्दल की नई मुहिम को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
इस आयोजन में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना का प्रभावशाली संगम देखने को मिला, जहां कविताओं और ग़ज़लों के माध्यम से तिरंगे के प्रति सम्मान और देशप्रेम की भावना को नई ऊर्जा मिली।
कार्यक्रम में अदबी संगम एवं सार्थक साहित्य मंच से जुड़े ख्यातिप्राप्त कवियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने अपनी कविताओं, ग़ज़लों और मुक्तकों के माध्यम से वीर रस, राष्ट्रगौरव और राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को सशक्त शब्दों में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने तालियों के साथ सराहा। आयोजन का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के महत्व, उसके सम्मान और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम में फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रवक्ता डॉ. राज कुमार ने राष्ट्रीय ध्वज जागरूकता अभियान–2026 के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने तिरंगे के इतिहास, राष्ट्रीय ध्वज संहिता के प्रावधानों तथा आम नागरिकों को सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहराने का संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सांसद नवीन जिन्दल द्वारा किए गए लंबे और ऐतिहासिक न्यायिक संघर्ष की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश के नागरिकों के सम्मान से जुड़ा हुआ था।
कार्यक्रम के दौरान 23 जनवरी को “तिरंगा अधिकार दिवस” के रूप में मनाए जाने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर इस राष्ट्रीय पहल के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस अवसर पर कवियों ने तिरंगे की महिमा और गौरव का बखान किया। कवियों ने शब्दों में तिरंगे के प्रति कर्तव्यों को भी प्रस्तुत किया। कवियों ने तिरंगे को देश की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक बताया ।
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