Raigarh News: सुर संगम कला समिति के पंडाल में 41 साल से विराज रहीं विद्या की देवी, रायगढ़ की पुरानी बस्ती में सरस्वती पूजा की विलुप्त होती परंपरा को नवजीवन दे रही युवा टीम

रायगढ़ January 24, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
Raigarh News: सुर संगम कला समिति के पंडाल में 41 साल से विराज रहीं विद्या की देवी, रायगढ़ की पुरानी बस्ती में सरस्वती पूजा की विलुप्त होती परंपरा को नवजीवन दे रही युवा टीम

Raigarh News: सुर संगम कला समिति के पंडाल में 41 साल से विराज रहीं विद्या की देवी, रायगढ़ की पुरानी बस्ती में सरस्वती पूजा की विलुप्त होती परंपरा को नवजीवन दे रही युवा टीम

रायगढ़। कला और संस्कारधानी नगरी रायगढ़ की पुरानी बस्ती इन दिनों विद्या की देवी की भक्ति में डूबी हुई है। चांदनी चौक में सुर संगम कला समिति के मनोहारी पंडाल में बसंत पंचमी की सुबह मां शारदे की पूजा-अर्चना होते ही सरस्वती माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

4 बच्चों ने 1986 में की थी शुरुआत
अविभाजित मध्यप्रदेश के सन 1986 में 4 बच्चों ने सुर संगम कला समिति की नींव रखते हुए सरस्वती पूजन समारोह की ऐसी शुरुआत की, जो आज वटवृक्ष बनकर धार्मिक आयोजन के लिए जानी मानी समिति बन गई। धर्म, संस्कृति और समाजसेवा में सक्रिय सुर संगम कला समिति के सदस्य बताते हैं कि सरस्वती पूजन की विलुप्त होती परंपरा को जीवंत रखना ही उनका उद्देश्य है। यही कारण है कि जन सहयोग से चांदनी चौक में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन भी कर चुके हैं।
बहरहाल, शारदा पूजन समारोह के बहाने ही सही, लेकिन पुरानी बस्ती की युवा टीम जिस तरह विलुप्तता की कगार पर जा रही सरस्वती पूजन की परंपरा को नए सिरे से हाईटेक कलेवर देने की जो सकारात्मक पहल कर रहे हैं , वह तारीफ-ए-काबिल जरूर है।

दिवंगत राजाराम थवाईत को दी श्रद्धांजलि
41 बरस से सरस्वती पूजन कर रही समिति के वरिष्ठ सदस्य और सेवानिवृत्त निगम कर्मचारी राजाराम थवाईत का चूंकि 4 रोज पहले असामयिक देहावसान हो गया, इसलिए शोक की इस घड़ी में सुर संगम कला समिति द्वारा सादगी से मूर्ति पूजा करते हुए दिवंगत श्री थवाईत को श्रद्धांजलि भी दी गई।

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