लाल किला हमला मामला: मौत की सजा पाने वाले आतंकी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी
साल 2000 के लाल किला हमले के दोषी मोहम्मद आरिफ की अंतिम कानूनी समीक्षा होगी

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2000 के लाल किला हमले के दोषी और लश्कर आतंकी मोहम्मद आरिफ की सुधारात्मक याचिका (क्यूरिटिव पिटिशन) पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। इस हमले में भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हुए थे।
आरिफ को निचली अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखा। इसके बाद 2022 में उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई थी। अब अंतिम कानूनी विकल्प के रूप में अदालत मामले की अंतिम समीक्षा करेगी।
📜 सजा की कानूनी यात्रा
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अक्टूबर 2005: निचली अदालत ने आरिफ उर्फ़ अशफाक को मौत की सजा सुनाई।
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सितंबर 2007: मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जिसने भी सजा को बरकरार रखा।
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अगस्त 2011: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन मौत की सजा बरकरार रही।
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अब: सुधारात्मक याचिका अंतिम समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में रखी गई है।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
गुरुवार को विशेष बेंच (CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी) ने याचिका पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। सीजेआई ने स्पष्ट कहा:
“नोटिस जारी करें।”
सुनवाई के दौरान वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिनमें आतंकी की अपील और पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए मौत की सजा को सही ठहराया गया था।
🪖 लाल किला हमला की पृष्ठभूमि
22 दिसंबर 2000 की रात, कुछ आतंकवादी लाल किले के उस हिस्से में घुसे, जहां 7 राजपूताना राइफल्स तैनात थे। गोलीबारी में सेना के तीन जवान शहीद हुए थे।
सुधारात्मक याचिका किसी व्यक्ति के पास अदालत के फैसले को चुनौती देने का अंतिम कानूनी विकल्प है।
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