युवा शक्ति जागी, संस्कार बना राष्ट्र निर्माण का हथियार
स्वदेशी संकल्प दौड़ में गूंजा संदेश— “डिग्री नहीं, चरित्र तय करेगा भारत का भविष्य”

रायपुर।
अगर शिक्षा के साथ संस्कार न हों, तो राष्ट्र की नींव कमजोर पड़ जाती है— यह साफ संदेश स्वामी विवेकानंद जी की 163वीं जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर रायपुर में देखने को मिला। सुभाष स्टेडियम से स्वामी विवेकानंद सरोवर तक आयोजित “स्वदेशी संकल्प दौड़” केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि युवा चेतना को झकझोर देने वाला संकल्प बन गई।
हजारों युवाओं के जोश, राष्ट्रप्रेम और ऊर्जा के बीच उच्च शिक्षा एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे माहौल को गंभीर और प्रेरणादायक बना दिया।
⚡ “शिक्षा अकेली काफी नहीं, संस्कार जरूरी”
मुख्य अतिथि मंत्री टंकराम वर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा—
“शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का माध्यम है। शिक्षा के साथ संस्कार होंगे, तभी राष्ट्र मजबूत बनेगा।”
उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाया, जिसे आज अपनाने की सबसे अधिक जरूरत है।
🇮🇳 अमृतकाल और युवाओं की निर्णायक भूमिका
मंत्री वर्मा ने कहा कि भारत आज आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है और देश की आबादी में युवाओं की बड़ी भागीदारी इसे विश्व मंच पर शक्तिशाली राष्ट्र बना सकती है।
उन्होंने विश्वास जताया कि—
“आने वाला दशक युवाओं की ऊर्जा, परिश्रम और नवाचार से भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।”
🎯 2047 का लक्ष्य… और युवाओं का इम्तिहान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
🚩 संकल्प की दौड़, भविष्य की दिशा
कार्यक्रम के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर स्वदेशी संकल्प दौड़ को रवाना किया और युवाओं को स्वदेशी अपनाने, राष्ट्रहित में कार्य करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया।
⚠️ सवाल अब यही है—
क्या आज का युवा सिर्फ डिग्री तक सीमित रहेगा, या संस्कार के साथ भारत को विश्वगुरु बनाने की जिम्मेदारी उठाएगा?
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