बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि वैवाहिक जीवन में किसी भी जीवनसाथी द्वारा बार-बार आत्महत्या की धमकी देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। यह व्यवहार दूसरे पक्ष के लिए असहनीय स्थिति पैदा करता है और दांपत्य जीवन जारी रखना संभव नहीं रहता।
मामला बालोद जिले का है, जहां पति-पत्नी ने 2018 में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। पत्नी ने पति पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और बार-बार आत्महत्या की धमकी दी। पति ने मानसिक प्रताड़ना और असहनीय परिस्थितियों के आधार पर फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन दिया।
फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में निर्णय देते हुए तलाक मंजूर किया, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार-बार धमकियाँ देना, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना और अनावश्यक मानसिक तनाव उत्पन्न करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। अदालत ने पत्नी की अपील को खारिज कर फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश बरकरार रखा।