भारत माला घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन!
43 करोड़ की धोखाधड़ी, रायपुर–महासमुंद में 9 ठिकानों पर छापेमारी से मचा हड़कंप

Chhattisgarh News | रायपुर:
छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर–विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर रायपुर और महासमुंद जिलों में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
🔍 किनके ठिकानों पर पहुंची ED?
ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय की अगुवाई में चल रही इस कार्रवाई के दायरे में
-
हरमीत सिंह खनूजा,
-
उनके करीबी सहयोगी,
-
कुछ सरकारी अधिकारी,
-
और भूमि मालिकों से जुड़े परिसरों को शामिल किया गया है।
ईडी ने प्रेस नोट में साफ किया कि यह कार्रवाई भारत माला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान की कथित गड़बड़ियों की गहन जांच के सिलसिले में की जा रही है।
💣 43 करोड़ की धोखाधड़ी, 78 करोड़ का फर्जी भुगतान!
जांच में सामने आया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में करीब 43 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
आरोप है कि जमीन के टुकड़ों को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया और रिकॉर्ड में हेराफेरी कर
➡️ NHAI को 78 करोड़ रुपये का गलत भुगतान दिखाया गया।
🕵️♂️ अधिकारियों–माफियाओं का सिंडिकेट
जांच एजेंसियों के अनुसार,
-
SDM,
-
पटवारी,
-
और जमीन माफिया
एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे।
पुरानी तारीखों के दस्तावेज तैयार कर मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया।
आरोपियों में निर्भय कुमार साहू समेत पांच अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन पर 43.18 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप है।
📍 159 प्लॉट बनाकर बढ़ा दी कीमत
अभनपुर के नायकबंधा और उर्ला गांवों में जमीन माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन को
➡️ 159 प्लॉट में बांट दिया,
जिससे जमीन का मूल्य
-
29.5 करोड़ से बढ़कर सीधे 78 करोड़ रुपये हो गया।
📊 324 करोड़ का मुआवजा, 78 करोड़ अब भी रोके गए
अभनपुर बेल्ट के 9.38 किलोमीटर हिस्से के लिए
-
कुल मुआवजा: 324 करोड़ रुपये
-
अब तक बांटा गया: 246 करोड़ रुपये
-
78 करोड़ रुपये अभी रोके गए हैं,
जिसे लेकर जांच एजेंसियों की नजर सबसे ज्यादा टिकी हुई है।
🏛️ विधानसभा तक पहुंचा मामला
राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में
-
विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने भारत माला परियोजना पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की।
-
वहीं राजस्व मंत्री टैंक राम वर्मा ने अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए बताया कि
अगस्त 2022 में शुरू हुई रायपुर कलेक्टर की जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई थी।
❌ अधिकारियों पर गिरी गाज
जांच के बाद सरकार ने कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जिनमें
-
नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण,
-
पटवारी जितेंद्र प्रसाद साहू, दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन शामिल हैं।
⚠️ अब बड़ा सवाल
क्या ED की यह छापेमारी
👉 बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों तक पहुंचेगी?
👉 78 करोड़ रुपये का सच आखिर कब सामने आएगा?
भारत माला घोटाले की यह जांच आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन—दोनों को हिलाने वाली साबित हो सकती है।
|
|
|
|
![]() |
![]() |
| ||






