छत्तीसगढ़

हड़ताल टूटते ही शिक्षाकर्मी संगठनों में पड़ी फूट : संजय शर्मा का आरोप – CM से मिलने का फैसला संयुक्त नहीं

वीरेंद्र दुबे का अकेला व महत्वाकांक्षा में लिया गया निर्णय, वीरेंद्र दुबे बोले- फूट की बात गलत, चारों प्रांताध्यक्ष को थी जानकारी

रायपुर 6 नवंबर 2017। देर रात नाटकीय तौर पर हड़ताल खत्म करने….और फिर मुख्यमंत्री से शिक्षाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल के मुलाकात के बाद शिक्षाकर्मी के हड़ताली मोर्चा के भीतर बवाल मचा है। चर्चा है कि हड़ताल की अगुवाई कर रहे नगरीय पंचायत संयुक्त मोर्चा में फूट पड़ गयी है। हालांकि संजय शर्मा को छोड़कर खुले तौर इसे और कोई प्रांताध्यक्ष स्वीकार नहीं कर रहा है। हालांकि ये तो तय है कि हड़ताल खत्म करने को लेकर जानकारी पांचों प्रांताध्यक्ष को थी….लेकिन फैसले को लेकर राय क्यों नहीं बन पायी, इस पर हर प्रांताध्यक्ष की अलग-अलग राय है। इसी बीच संजय शर्मा ने एक बयान जारी का स्पष्ट कर कुछ लोगों पर महत्वाकांक्षी होने का संगीन आरोप लगाया है।

संजय शर्मा ने मीडिया को भेजे बयान में कहा है कि ‘हड़ताल खत्म करने का फैसला संयुक्त था, लेकिन मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला प्रांतीय संचालकों का एक नहीं था, सिर्फ एक संगठन वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में मिला, ये फैसला महत्वाकांक्षा में लिया गया फैसला है’
संजय शर्मा के इस बयान के बाद संगठन के भीतर फूट की चिंगारी तो भड़कनी शुरू हो गयी है। हालांकि प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं…वीरेंद्र दुबे ने कहा कि
“फूट का तो सवाल ही नहीं होता, हड़ताली शिक्षाकर्मी के पांचो प्रांताध्यक्षों मुख्यमंत्री से मिलने के प्रस्ताव की जानकारी दे दी थी, खुद मैंने चंद्रदेव राय, विकास राजपूत और केदार जैन से बातचीत की, जबकि संजय शर्मा को फोन नहीं लगा, शुरूआत में चंद्रदेव, विकास और केदार मुख्यमंत्री से मिलने को राजी थी, लेकिन बाद में वो मुकर गये, तब तक मिलने की रजामंदी सीएम हाउस को दे दी गयी थी, उस परिस्थिति में मुलाकात को नहीं जाना असंभव था, जहां तक मेरी महत्वाकांक्षा की बात है, मैंने अपने जिंदगी में कभी भी महत्वाकांक्षा की बात नहीं की, मैं शिक्षाकर्मी हूं और शिक्षाकर्मी की हित की ही लड़ाई लड़ता हूं…ना वर्चस्व की बात है और ना ही खुद को महत्वाकांक्षी साबित करने का कोई इरादा है। मैं एक बार फिर फिर कहता हूं सभी को मुख्यमंत्री से मिलने के प्रस्ताव की जानकारी थी…फिर एकाएक फैसला क्यों बदला, वो मुझे समझ नहीं आ रहा’

इधर प्रांताध्यक्ष विकास राजपूत भी फूट की बात से इंकार रहे हैं, विकास राजपूत ने कहा कि ‘मुझे जानकारी थी, लेकिन मैं हड़ताल टूटने के बाद सीधे घर आ गया था, जाने में असमर्थ था, इसलिए नहीं गया। हालांकि मिलने को लेकर ये जरूर तय हुआ था कि हम लोग तीन-चार दिन बाद में मिल लेंगे, लेकिन तब तक समय मिल चुका था, और वीरेंद्र दुबे गये है मिलने तो ठीक है, हमलोग बाद में मिल लेंगे’
हालांकि इस मामले में संजय शर्मा से भी NPG ने बात करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल स्वीच आफ बता रहा था, वहीं केदार जैन ने फोन नहीं उठाया। जबकि एक अन्य प्रांताध्यक्ष चंद्रदेव राय से संपर्क नहीं हो सका।

साभार न्यू पावर गेम

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