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फायनेंस कंपनी को पौने नौ लाख का फटका लगाने वाला मैनेजर गिरफ्तार, आरोपी से 1 लाख 62 हजार बरामद, कोतवाली पुलिस को पांच माह बाद मिली सफलता

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रायगढ़। निजी फायनेंस कंपनी में मैनेजर पद पर रहते हुए अपने बॉस को धोखा देकर कंपनी के खाते से 8 लाख 76 हजार रूपये का आहरण कर फरार होने के पांच माह पुराने मामले में कोतवाली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इसके पास से 1 लाख 62 हजार रूपये बरामद किया है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार करीब पांच माह पूर्व कोतवाली थाना क्षेत्र में निजी फायनेंस कंपनी से फर्जी आहरण का मामला प्रकाश में आया था। पुलिस ने इस मामले में माइको फायनेंस कंपनी के जी.एम.विनोबा नगर बिलासपुर निवासी अनिल कुमार दुबे की रिपोर्ट पर कंपनी के मैनेजर परदेशी खूंटे पिता दशरथ खूंटे उम्र 24 वर्ष निवासी आमाकोनी, जैजैपुर जिला जांजगीर चांपा के खिलाफ धारा 406 अमानत में खयानत का मामला दर्ज कर प्रकरण को जांच में ले लिया था। प्रार्थी के अनुसार जब वह विभागीय कार्य से रायपुर गया था इसी दौरान आरोपी ने उसे धोखे में रखकर कंपनी के बैंक खाते से करीब 8 लाख 76 हजार रूपये का आहरण कर लिया और फरार हो गया। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पते-ठिकानों पर मुखबिर लगा दिए थे। इसी क्रम में कल पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अपने गृहग्राम में छिपा हुआ है। जिस पर पुलिस टीम ने कल रात आरोपी के गांव में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से 1 लाख 62 हजार रूपया बरामद किया है जबकि शेष राशि को आरोपी ने खर्च कर देना बताया है। इस तरह लगाया चूना बताया जाता है कि आरोपी मैनेजर परदेशी खूंटे ने कंपनी में काम करने के दौरान अपने बॉस अनिल दुबे का विश्वास प्राप्त कर लिया। इस फायनेंस कंपनी के लेनदेन बैंक आफ इंडिया से होता था और खाते से आहरण दोनों के हस्ताक्षर पश्चात ही होते थे। इसी बीच अनिल को किसी काम से जब रायपुर जाना पड़ा तो परदेशी ने एक पेमेंट का हवाला देकर उससे कोरे चेक पर दस्तखत करा लिये। आरोपी को पता था कि एक दिन पहले तक कंपनी में करीब 9 लाख रूपये जमा था इसलिए आरोपी ने पौने नौ लाख रूपये का दोनों के हस्ताक्षरित चेक से आहरण कर लिया और रकम लेकर फुर्र हो गया। आरोपी को कई माह से नहीं मिला था वेतन अमानत में खयानत करने के 5 माह पुराने इस मामले के आरोपी परदेशी खूंटे को अपने किये पर कोई पछतावा नहीं था। उसने बताया कि कंपनी के अधिकारियों द्वारा लोन लेने वाले सदस्यों से 12 प्रतिशत की जगह साढ़े तेरह प्रतिशत ब्याज वसूल करने का दबाव डाला जाता था वहीं उसे कई माह से वेतन नहीं दिया जा रहा था। कई बार वेतन के लिए प्रबंधन से गुहार लगाने के बावजूद उसके मामले को टाल दिया जाता था जिसके कारण उसके परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया था इसलिए मौका मिलने पर मजबूरी में उसने यह अपराध किया।