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चार किशोरी सहित 5 नाबालिग पकड़ाये, मानव तस्करी का संदेह, पुलिस ने बुलवाया परिजनों को

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रायगढ़। मानव तस्करी को रोकने के लिए शासन-प्रशासन के तमाम उपाय और कई तरह के कानूनों के बावजूद नाबालिग बच्चों को काम दिलाने का लालच देकर दलालों के माध्यम से प्लेसमेंट एजेंसियों के हवाले करने का मामला आए दिन उजागर हो रहा है। इसी कड़ी में बीती रात ऐसा ही एक मामला उस वक्त प्रकाश में आया जब रात्रि गश्त में तैनात कोतवाली पुलिस की टीम ने चार नाबालिग किशोरियों व एक युवक को दलाल सहित रेल्वे स्टेशन में संदिग्ध हालत में पकड़ा। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें कोतवाली लाया गया तथा उनके परिजनों को वाकये से अवगत कराया गया। कोतवाली पुलिस द्वारा इस संदिग्ध मामले की जांच की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात रात्रि गश्त में तैनात युवा सब इंस्पेक्टर सौरभ सिंह ने रात करीब ढ़ाई बजे रेल्वे स्टेशन के मुख्य द्वार पर चार नाबालिग लड़कियों के साथ दो युवकों को संदेह के आधार पर पकड़ा। इन सभी के पास अलग-अलग बैग था। जिनसे पूछताछ के दौरान यह बात सामने आयी कि एक युवक सहित पांचों नाबालिग लड़कियां छत्तीसगढ़ से लगे झारखंड प्रांत के लोहरदगा जिले के किस्को थाना क्षेत्र के ग्राम चांपी व बडग़ू गांव के निवासी हैं। इन नाबालिगों में अजय आत्मज सुलू उरांव जिसकी उम्र लगभग 16 साल है वह लोहरदगा का निवासी है वहीं नाबालिग किशोरियों में चांपी की एक किशोरी जिसकी उम्र 15 साल है, दूसरी 16 वर्ष की तथा तीसरी भी 16 वर्ष की है। वहीं बडग़ू निवासी किशोरी की उम्र 16 वर्ष बताया गया। इन पांचों को काम दिलाने के नाम पर झारखंड प्रांत के लातेहार निवासी राम साय भगत पिता मन्नालाल भगत उम्र 22 वर्ष, वासुदेव बस से लेकर आधी रात को रायगढ़ आया था। पूछताछ के दौरान राम साय ने बताया कि वह इन बच्चों को लेकर डभरा थाना क्षेत्र के ग्राम ओड़ेकेरा ले जा रहा था। उसने यह भी बताया कि ओड़ेकेरा में उसके चाचा धनेश्वर भगत जो एक संयंत्र में ठेकेदार का काम करते हैं। उनके पास ले जा रहा था। राम साय की मानें तो उसके ठेकेदार चाचा धनेश्वर के कहने पर वह इन बच्चों को काम कराने के लिए आदिवासी बाहुल्स क्षेत्र लोहरदगा से लेकर आया था। पुलिस के पूछताछ के दौरान नाबालिग लड़कियों ने बताया कि वे सभी अपने परिजनों की सहमति और अपनी स्वयं की मर्जी से आयी है। बगैर परिजनों के साथ ये बच्चियां एक दलाल के माध्यम से अगर काम करने भी निकली हैं तो यह मामला शासन व प्रशासन के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह मामला पलायन के साथ-साथ बाल श्रम से भी जुड़ा हुआ है। पूरे देश में नरेगा के माध्यम से स्थानीय लोगों को काम के साथ-साथ अच्छी-खासी मजदूरी दी जाती है फिर भी लोग अपने अव्यस्क बच्चों को काम के नाम पर ऐसे लोगों के हवाले कर रहे हैं जो इन्हीं बच्चों के नाम से दलाली करते रहे हैं। रात के इस मामले में सभी नाबालिग बच्चों व दलाल को कोतवाली लाया गया तथा उनके परिजनों को उक्ताशय की जानकारी दी गयी। पुलिस सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि ये नाबालिग बच्चे परिजनों की जानकारी में दलाल के माध्यम से काम करने ओड़ेकेरा जा रही थी। अगर पुलिस व प्रशासन ऐसे मामलों में निष्पक्ष होकर कार्रवाई करती है तो काम के बहाने बच्चों की दलाली करने वाले न केवल एजेंटों पर अपराध दर्ज होगा बल्कि उनके परिजनों को भी कटघरे में खड़ा किया जा सकेगा। इस विषय पर थाना प्रभारी सुशांतो बनर्जी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि एक युवक सहित चार नाबालिगों को संदेह के आधार पर पकड़ा गया था अगर किशोरियों के बयान में स्वयं की मर्जी से जाने की बात सामने आयी जिसके बाद उनके परिजनों को सूचना देकर बुलाया गया है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।