रायगढ़

जिला मुख्यालय में बन रहा राज्य का तीसरा उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला

1 करोड़ की लागत से विशालकाय भवन का निर्माण अंतिम चरण में
बिलासपुर, सरगुजा सम्भाग के 10 जिले होंगे लाभान्वित

रायगढ़ टॉप न्यूज 14 जुलाई। औद्योगिक नगरी रायगढ़ में राज्य का तीसरा उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला बन रहा है। 1 करोड़ की लागत से बन रहे विशालकाय भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। यह भवन जुलाई के अंत तक बनकर पूरा हो जाएगा। इस प्रयोगशाला का लाभ बिलासपुर, सरगुजा संभाग के 10 से ज्यादा जिलों को मिलेगा। इस प्रयोगशाला के बन जाने के बाद हर तरह के खाद के असली या नकली की पहचान हो सकेगी। ऐसे में खराब गुणवत्ता वाले खाद्य के वितरण पर तत्काल रोक लगाई जा सकेगी।

प्रदेश में उर्वरक परीक्षण प्रयोग शाला केवल रायपुर में ही है। गत वर्ष शासन ने राजनांदगांव के साथ रायगढ़ में उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला निर्माण की स्वीकृति दी थी। इस प्रयोगशाला भवन का निर्माण आरईएस विभाग कर रही है। बताया जाता है कि इससे पहले कृषि विभाग को उर्वरक की जांच कराने के लिए गुजरात और फरीदाबाद पर निर्भर रहना पड़ता था। जिसमेंं कई माह बीतने के बाद ही परीक्षण रिपोर्ट आता था लेकिन जिला मुख्यालय में इस भवन के निर्माण के बाद अब तुरंत खाद जैसे यूरिया पोटाश, व मिक्चर खाद की जांच की जा सकेगी। इस विशालकाय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक यंत्रों और जांच की सभी सामग्री लगाई जाएगी। इस प्रयोगशाला के निर्माण से बिलासपुर और सरगुजा संभाग के जिलों को भी जल्द उर्वरक का परीक्षण कराने में सुविधा मिलेगी। अधिकारियों की माने तो अत्यधुनिक उपकरणों से लैश इस प्रयोगशाला का पूरा निर्माण जुलाई के अंत तक पूरा हो सकेगा।

यहां बताना लाजिमी होगा कि जिले में कुल 2 लाख 97 हजार 500 हेक्टेयर जमीन में खेती की जाती है। जिसे में 1 लाख 21 हजार 590 हेक्टयेर में रबी की फसल ली जाती है। किसान खरीफ एवं रबी की फसलों के अधिक उत्पादन के लिए अधिक रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे है। जिसका दुष्परिणाम अब सामने आने लगा है। साथ ही खेतों में फसल चक्र नहीं अपनाए जाने के कारण मिट्टी की उर्वरता लगातार कम हो रही है। जिले में मिट्टी जांच में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा में लगातार कमी आ रही है। वहीं अब खेतों की मिट्टी अम्लीय भी हो रही है। सबसे खराब स्थिति पुसौर और बरमकेला क्षेत्र की मिट्टी की है। यहां की मिट्टी जहां अम्लीय है। वहीं ऑर्गेनिक कार्बन की भी मात्रा निम्न स्तर पर है। अन्य पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर निम्न व अपर्याप्त मात्रा में है। ऐसे में मुख्यालय में बन रहे प्रयोगशाला का काफी लाभ मिल सकेगा। इससे जहां मिट्टी के परीक्षण उपरांत खाद से उसका उपचार किया जा सकेगा। वहीं मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने भी मदद मिलेगी।

औद्योगिक जिले में कृषि पर सरकार का जोर
भले ही रायगढ़ जिला औद्योगिक जिला माना जाता है। यहां कोयला और पत्थर के उद्योग ज्यादा हैं लेकिन सरकार इस जिले में कृषि पर भी जोर दिखा रही है। यही कारण है कि राज्य भर में उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला बनाने के लिए राजनांदगांव के बाद रायगढ़ का चयन किया गया है। रायगढ़ में प्रयोगशाला बनाने का उद्देश्य भी यही है कि आसपास के जिलों का भी परीक्षण इसी प्रयोगशाला से हो सके। वहीं जिले में औद्योगिकीकरण की तरह सरकार फसल की बढ़ोत्तरी कर समतुल्यता लाने का प्रयास कर रही है। राज्य सरकार के नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी प्रोजेक्ट में भी यह प्रयोगशाला काफी अहम भूमिका निभाएगी।

कालाबाजारी और घटिया सप्लाई पर लगेगी रोक
रायगढ़ जिले में खाद की सबसे ज्यादा कालाबाजारी होती है। घटिया स्तर के खाद्य को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सप्लाई किया जाता है। जिले में कुछ व्यापारी घटिया उर्वरक मंगाते हैं और उसे समितियों में भेजकर अवैध लाभ अर्जित करते हैं।
गोबर खाद से लेकर रासायनिक खाद की सप्लाई के नाम पर घटिया खाद भेजी जाती है। जांच का आधार नहीं होने का फायदा उठाकर सप्लायर घटिया से घटिया खाद की सप्लाई कर लाखों का बंदरबाट करते आ रहे हैं। ऐसे में मुख्यालय में बनने वाले प्रयोगशाला के बाद घटिया खाद की सप्लाई पर काफी हद तक लगाम लग सकेगा। जिससे जिले में कृषि का स्तर और सुधर पाएगा।

जिला मुख्यालय में 1 करोड़ की लागत से उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण हो रहा है। यह जिले के लिए एक उपलब्धी से कम नहीं है। इस प्रयोगशाला का लाभ बिलासपुर और सरगुजा संभाग के जिले भी ले सकेंगे। यहां परीक्षण के बाद घटिया खाद के विरतण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
एलएम भगत, डीडीए रायगढ़

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