रायगढ़

धर्म ही व्यक्तिगत और सामजिक जीवन का आधार होना चाहिए. राज्यस्तरीय सेमीनार का हुआ पंचायती धर्मशाला में समापन

रायगढ़ टॉप न्यूज 14 जुलाई। आनन्दमार्ग संगठन का त्रिदिवसीय सेमीनार आज सम्पन्न हुआ जिसमें छत्तीसगढ़ के लगभग 200 आनन्दमार्गियों ने हिस्सा लिया…दिल्ली में कार्यरत मार्ग के वरिष्ठ सन्न्यासी आचार्य वन्दनानन्द अवधूत मुख्य प्रशिक्षक थे…उन्होंने “” वेद और तन्त्र””, “”आध्यात्मिक साधना का व्यक्तिगत और सामुहिक जीवन में महत्व”” पर सारगर्भित प्रवचन दिये और साथ ही साथ “” आर्थिक लोकतन्त्र”” पर विषद चर्चा की….उन्होंने कहा कि वेद मानव मनीषा का अभिनव विकास है….जैसे जैसे ऋषियों की अनुभूति बढ़ती गई, वैसे वैसे उनकी समझ भी बढ़ती गई….यही कारण है कि उपासना काण्ड और कर्म काण्ड में बाहरी आडम्बर दिखाई देता है लेकिन ज्ञान काण्ड में ऋषि यह समझा रहे हैं कि “”तत् त्वम असि”” अर्थात तू ही परमात्मा है….परमात्मा को यदि पाना है तो उन्हें हमें अपने मन के अन्दर खोजना होगा…उन्होंने यह भी कहा कि वेद मे केवल प्रार्थना है…परमात्मा तक पहुँचने कोई गूढ़ संकेत नहीं है…जबकि तन्त्र व्यवहारिक पद्धति है…तन्त्र की स्थापना आदि गुरु शिव ने किया है…तन्त्र में ही दीक्षा का प्रावधान है…तान्त्रिक गुरु और शिष्य के सम्बन्ध की विषद व्याख्या है…उन्होंने स्पष्ट घोषणा किया कि वैदिक सभ्यता की हम पर छाप है किन्तु हम लोग भगवान शिव द्वारा स्थापित तान्त्रिक सभ्यता के प्रतिनिधि हैं

वन्दनानन्द जी ने कहा कि अपने मन मन्दिर में छुप कर बैठे हुए परमात्मा से साक्षात्कार करना और उसके लिये सदगुरु द्वारा सिखलाई गई आध्यात्मिक साधना करना ही धर्म है….दुख इस बात का है कि सारी दुनिया में लोग धर्म के नाम पर अन्धविश्वास में उलझ कर रह गए हैं…यह भी ग़लत धारणा है कि धर्म केवल बन्द कमरे की वस्तु है…सच तो यह है कि व्यक्तिगत जीवन में धर्म परमात्मा से साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है और सामाजिक जीवन में धर्म ही लोगों को नैतिकता का पालन करने की प्रेरणा देता है.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज समाज में चारोंतरफ जो हाहाकार मचा हुआ है…देशभक्ति की लम्बी चौड़ी बातें करने वाले लोग जो करोड़ों अरबों रुपयों के घोटालों और भ्रष्टाचार में लिप्त नज़र आ रहे हैं….समाज में जिस तरह भयानक तेज़ रफ्तार से घृ़णित अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है उसका एक मात्र कारण ये है कि जनसाधारण धर्म से दूर बहुत दूर हो गया है और धर्म के तथाकथित ठेकेदारों ने उसे धार्मिक आडम्बर में उलझा कर रख दिया है…आनन्द मार्ग सारी दुनिया में सनातन धर्म का,…जिस सद्मार्ग पर हमारे ऋषि मुनी चले उसी धर्म का प्रचार कर रहा है…मानव जाति को नैतिक पतन की अन्धी खाई में गिरने से बचाने का और कोई रास्ता नहीं है.

वन्दनानन्द जी यह भी कहा कि देश का नेतृत्व जब तक धार्मिक व्यक्ति के हाथों में नहीं आएगा तब तक जनसाधारण को राजनीतिक भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं मिलेगी. इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए श्री प्रभातरञ्जन सरकार ने एक सर्वथा मौलिक सामाजिक-आर्थिक दर्शन “”प्रगतिशील उपयोग तत्व “” का प्रतिपादन किया है, जिसे संक्षिप्त में “”प्रउत”” कहा जाता है..
प्रउत के अनुसार राजनीति का मतलब है “गार्जियनशिप” अर्थात नेतागण देशवासियों के अभिभावक होते हैं…प्रउत “”आर्थिक लोकतन्त्र”” की वकालत करता है जिसके अनुसार अपने देशवासियों के लिये न्यूनतम आवश्यकताओं ( भोजन, वस्त्र, आवास, चकित्सा और शिक्षा ) की पूर्ति करना नेताओं का सबसे पहला कर्तव्य है ….यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें देश का नेतृत्व करने का कोई अधिकार नहीं है….हमारा संसदीय लोकतन्त्र वास्तव में पूँजीवाद पर आधारित है इसलिये देश की समस्त आर्थिक नीतियाँ पूँजीपतियों के हित को ध्यान में रख कर बनाई जाती हैं…सेमीनार में यह निर्णय लिया गया कि आनन्दमार्गी लोग जनसाधरण को राजनीतिक और आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाने के लिये जनसाधारण तक प्रउत का सन्देश भी फैलाएँगे.

वन्दनानन्द जी ने कहा कि साम्यवाद दम तोड़ चुका है और पूँजीवाद पर टिकी हुई व्यवस्था भी लड़खड़ा रही है…सारी दुनिया में शोषण पर आधारित पूँजीवादी व्यवस्था के खि़लाफ जन आन्दोलन हो रहे है…प्रउत को मkनने वाले प्राइटिष्ट लोग जनआन्दोलन का नेतृत्व करेंगे और उसे सही दिशा देंगे.
सेमानार के समापन पर सेमानार के आयोजक आचार्य करुणकृष्णानन्द, आचार्य ऋतेश्वरानन्द, आनंद मार्ग के भुक्ति प्रधान रायगढ़ रूपलाल पटेल ने दूर दूर से आए आनन्दमार्गियों और प्रशिक्षक महोदय का आभार प्रकट किया. उपस्थित लोगों ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्तर तक आनन्दमार्ग के सन्देस को फैलाने का संकल्प लिया. प्रभारी
प्रचार प्रसार डॉ.गजेंद्र चक्रधारी

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