छत्तीसगढ़

रोटा वायरस टीकाकरण 1 जुलाई से

अम्बिकापुर : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस.सिसोदिया ने बताया है कि सरकारी अस्पतालों एवं संस्थाओं में जुलाई माह से बच्चों को रोटा वायरस का टीका भी लगाया जा सकेगा। नियमित टीकाकरण के अंतर्गत रोटा वायरस के टीके का समावेश किया जा रहा है। इसके अभिमुखीकरण हेतु कार्यशाला का आयोजन दिनांक 10 जून को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में किया गया।

इस संबंध में जिले के समस्त बी.एम.ओ., बी.पी.एम. बी.ई.ई., मितानिन को-ऑर्डिनेटर, साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग की डी.पी.ओ, सी.डी.पी.ओ, सुपरवाइजर को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण डॉ. सीमा सिंह द्वारा दी गयी।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि रोटा वायरस वह विषाणु है जिसकी वजह से आंतों का इंफेक्शन (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) होता है। इस इंफेक्शन से आंत की अंदरूनी परत को नुकसान पहुॅचता है और इससे आपका शरीर भोजन से केवल थोड़े से या फिर कोई पोषक तत्व अवशोषित नहीं कर पाता। उन्होने बताया कि छह माह से दो साल तक के बच्चों को इसका खतरा सबसे अधिक होता है।

अध्ययन दर्शाते हैं कि पांच साल के होने से पहले तकरीबन हर बच्चें को यह इंफेक्शन होता है। यह वायरस बहुत ही संक्रामक है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सामान्य संपर्क से भी आसानी से फैल जाता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी फैल सकता है।

प्रशिक्षण दे रहीं डॉ. सिंह ने बताया कि इंफेक्शन के संपर्क में आने के करीब 18 से 36 घंटों के भीतर आपके शिशु में इसके लक्षण दिखाई दे सकते है। इसके आम लक्षणों में बुखार, मिचली, उल्टी, हल्के से लेकर गंभीर दस्त (डायरिया) जो कि 3 से 7 दिन तक बने रहने से पेट में मरोड़, खांसी, नाक बहना आदि शामिल है।

प्रशिक्षण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. राजेश भजगावली ने रोटा वायरस से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया कि यह लाखों में 10-12 लोगों को होती है। साथ ही यह भी बताया कि 1 जुलाई से यह टीका सभी सरकारी अस्पतालों एवं संस्थानों में मुफ्त में लगाया जा सकेगा जो कि प्राइवेट संस्थानों में यह टीका महंगे दर पर लगाया जाता था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close