छत्तीसगढ़

सोलर इनर्जी में भूपेश सरकार का बड़ा फैसला, अब सोलर प्लांट का ग्रिड से जोड़ा जाएगा, वन थर्ड लागत में उपलब्ध होगी बिजली, बिजली का नुकसान भी नहीं

रायपुर, 14 मई 2019। सौर उर्जा के क्षेत्र में भूपेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सोलर प्लांट को बिजली ग्रिड से जोड़ने की योजना को हरी झंडी दे दी है। इससे फायदा यह होगा कि एक्सेज बिजली का नुकसान नहीं होगा, वह सीधे ग्रिड में चली जाएगी। क्रेडा ने मोर छत, मोर बिजली योजना के तहत फर्स्ट फेज में 300 सरकारी भवनों का चयन किया है। उन इमारतों पर सोलर सिस्टम लग जाने के बाद संबंधित विभागों को बिजली बिल वन थर्ड हो जाएगा। वहीं, बची बिजली ग्रिड में जाने पर उसका एडजस्ट भी किया जाएगा। इसमें बिजली वितरण कंपनी की भूमिका भी अहम होगी। क्योंकि, ग्रिड में जाने वाली बिजली को जिस पार्टी को बेची जाएगी, उससे पैसा वसूल कर वह वेंडर को देगी। इसमें सबसे खास बात यह है कि इसमें पूरा इंवेस्ट वेंडर करेंगे। सिर्फ उन्हें अपना छत मुहैया कराना होगा।
मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य होगा, जहां यह योजना प्रारंभ की जा रही है। हालांकि, अफसरों का दावा है कि कुछ मामलों में छत्तीसगढ़ की मोर छत, मोर बिजली मध्यप्रदेश से ज्यादा कारगर साबित होगी। जानकारों का कहना है, छत्तीसगढ़ का कांसेप्ट मध्यप्रदेश से भी बढ़ियां है। वेंडरों की विश्वसनीयता के लिए डिस्कॉम की भी मदद ली जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 50 मेगावाॅट के सौर संयंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। नई सरकार के गठन होते की क्रेडा के प्रस्ताव के अनुसार छत्तीसगढ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा सोलर रूफटाॅप रेग्युलेशन में संशोधन कर नेट मीटरिंग रेग्यूलेशन लागू किया गया है। इससे सोलर बिजली उत्पादन से जुडी इकाईयों एवं उपभेक्ताओं में हर्ष का माहौल है। सभी संबंधित पक्षों द्वारा नई सरकार के इस कदम की सराहना की गई है।

नवीन (संशोधित) रेग्यूलेशन अनुसार अब 1 किलोवाॅट से 1 मेगावाॅट क्षमता तक के ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र स्थापित कर हितग्राही उत्पादित विद्युत का स्वयं उपभोग कर सकेगा तथा ग्रिड में प्रवाहित विद्युत का नेट मीटरिंग के माध्यम से विद्युत देयक में समायोजित होगा। इस प्रणाली से हितग्राही के विद्युत व्यय में बचत होगी एवं उसे सस्ती दर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

पूर्व में ग्रिड कनेक्टेड रेग्युलेशन के तहत् 10 किलोवाॅट से अधिक क्षमता के संयंत्र पर ही ऐसे संयोजन हेतु पात्र थे तथा ग्रिड में प्रवाहित विद्युत का समायोजन नियामक आयोग द्वारा निर्धारित लेवलाईज्ड टैरिफ का 50 प्रतिशत की दर से किया जाता था, जिससे हितग्राही को समुचित लाभ प्राप्त नहीं होता था। इसके कारण सोलर के क्षेत्र में आम उपभोक्ता रूचि नहीं दिखाते थे। इसे ध्यान में रखते हुए क्रेडा के द्वारा विस्तृत कार्ययोजना बनाकर तथा आवश्यक संशोधन सुझाते हुए राज्य शासन के समक्ष रखा गया।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश की सरकार ने इस दिशा में तेजी से कार्य किया गया । मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा शीघ्र ही सस्ती दरों पर एवं असानी से सोलर बिजली प्रदान करने के निर्देश दिये गए।

अब सभी वर्ग के हितग्राही सौर संयंत्र की स्थापना कर अधिक से अधिक विद्युत व्यय में बचत कर सकेंगंे। नवीन नेट मीटरिंग रेग्यूलेशन के अनुसार सभी वर्ग के विद्युत उपभोक्ता अपनी विद्युत भार क्षमता के बराबर संयंत्र की स्थापना कर सकेंगे।

इच्छुक हिग्राही को सोलर रूफटाॅप संयंत्र स्थापना की अनुमति एवं ग्रिड संयोजन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित की वेबसाईट/वेब पोर्टल में आवेदन करना होगा। विद्युत मंडल द्वारा 7 दिवस के भीतर तकनीकी मंजूरी प्रदान की जावेगी तथा संयंत्र स्थापना उपरांत सूचना प्राप्त होने पर अधिकतम 15 दिवस के भीतर विद्युत मंडल द्वारा सौर संयंत्र का निरीक्षण कर ग्रिड संयोजन किया जाएगा। नवीन रेग्यूलेशन के अनुसार ग्रिड संयोजन हेतु हितग्राही को अब किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा।

इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित द्वारा डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी सेल का गठन किया जाएगा, जो कि सभी संबंधितांे से आवश्यक समन्वय करेगा।

क्रेडा द्वारा प्रदेश के शासकीय भवनों में इस योजना का लाभ प्रदान किये जाने की दृष्टि से प्रथम चरण में लगभग 300 शासकीय भवनों का चयन किया गया है जिसमें कुल 15 मेगावाॅट क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र की स्थापना रेस्को प्रणाली के अंतर्गत किया जाना प्रस्तावित है। रेस्को प्रणाली के तहत् हितग्राही संस्था/विभाग को प्रारंभिक व्यय नहीं करना होगा। चयनित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा हितग्राही संस्था/विभाग की छत पर सौर संयंत्र की स्थापना की जाएगी तथा निविदा उपरांत निर्धारित दरों पर अगले 25 वर्षों तक विद्युत क्रय अनुबंध के तहत् हितग्राही संस्था/विभाग को विद्युत विक्रय करेगा। उत्पादित विद्युत की राशि विद्युत मंडल द्वारा हितग्राही से वसूल कर स्थापनाकर्ता इकाई को भुगतान की जाएगी। इस प्रकार की प्रणाली देश में पहली बार छत्तीसगढ राज्य में लागू की जा रही है। हितग्राही एवं स्थापनाकर्ता इकाई के हितलाभ की दृष्टि से इस प्रणाली का प्रयोग सफल होने की प्रबल संभावना है।

चयनित शासकीय भवनों में रेस्कों प्रणााली के अंतर्गत ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र स्थापना हेतु निविदा जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र की स्थापना से हरित ऊर्जा का उत्पादन कर पंरपरागत विद्युत स्त्रोंतों पर निर्भरता कम की जा सकेगी।

क्रेडा के द्वारा अभी तक लगभग 45 मेगावाॅट कुल क्षमता के रूफटाॅप सोलर पाॅवर प्लांट की स्थापना की जा चुकी है। ज्ञात हो कि क्रेडा के माध्यम से स्थापित विभिन्न प्रकार के अपारंपरिक स्त्रोंतों से 783 मेगावाॅट क्षमता के संयंत्रों से विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है।

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