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दिल्ली के होटल में आग: दहशत में बिल्डिंग से कूदे लोग, 17 की मौत

नई दिल्ली। करोल बाग का चार मंजिला होटल ‘अर्पित’ आज तड़के आग लगने से सुबह तक 17 लोगों की जिंदगियां लील चुका था, जिनमें एक बच्चा और महिलाएं भी हैं। मरने वालों में ज्यादातर लोग दिल्ली आए टूरिस्ट व अन्य लोग थे। म्यांमार और कोच्चि से आए लोग भी इनमें शामिल हैं। कुछ अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही थी, जिन्हें दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। 17 लोगों की जिंदगियां लील लेने वाले इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है और मरने वालों के परिजनों को सांत्वना दी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने दुर्घटना में मारे गए मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है।

सुबह 10 बजे तक अग्निशमन विभाग ने होटल से 30 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालने की जानकारी दी। साथ ही आग पर काबू पाने के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने की बात कही। हादसे में खत्म हुए ज्यादातर लोग एक ही परिवार से बताए जा रहे हैं, जो केरल के कोच्चि के रहने वाले हैं। कल ही किसी शादी में शामिल होने दिल्ली आए थे। खबर लिखे जाने तक कुछ मृतकों की पहचान नहीं हुई थी।

इस हादसे ने करोल बाग ही नहीं, पहाड़गंज और दिल्ली भर के होटलों में सुरक्षा इंतजामात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 17 लोगों की मौत पर बात करते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने दुख जताते हुए कहा कि ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने की वजह से हुई।

सीएम केजरीवाल ने की मुआवजे की घोषणा
केजरीवाल ने कहा कि करोल बाग के होटल अर्पित में लगी आग में 17 लोगों की मौत हुई है। सरकार मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा देगी।
इस घटना में ज्यादातर मौतें धुएं से दम घुटने के कारण हुई हैं। होटल के एसी कमरों की खिड़कियां (शीशे की विंडो) पैक थीं, जिस वजह से धुआं बिल्डिंग से बाहर नहीं निकल पाया। कमरों में भरता गया। गहरी नींद में होने की वजह से होटल में ठहरे गेस्ट धुएं और आग की चपेट में आते गए, हालांकि अस्पताल पहुंचे कई शव जली हालत में भी मिले, लेकिन माना जा रहा है कि दम घुटने की वजह से वे लोग बेसुध होकर लपटों की चपेट में आए। आग लगने के दौरान चार-पांच लोगों ने बिल्डिंग से भी छलांग लगा दी। सुनने में आया है कि दो लोगों ने तकियों के सहारे छलांग लगा दी। उनमें भी दो की मौत हो गई।

रेस्क्यू के दौरान निकाले गए शवों और घायलों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग अस्पताल, गंगा राम व आसपास के अन्य नर्सिंग होम में ले जाया गया। आग तड़के करीब 4 बजे लगी। यह होटल बेसमेंट के अलावा चार मंजिला है जिसमें लगभग 65 कमरे बताए जा रहे हैं। ऊसके ऊपर रसोई बनी है। बताया जा रहा है कि आग पहली मंजिल से भड़की, जो ऊपर के फ्लोर पर बढ़ती गई। दिल्ली फायर सर्विस के एक अधिकारी के अनुसार, जिस समय होटल में आग लगी, उसमें 100 से ज्यादा गेस्ट और 15-20 कर्मी मौजूद थे। जिसकी समय रहते आंख खुल गई, वह भागने में कामयाब रहा। बाकी अंधेरे और धुएं में फंस गए।

होटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नदारद थे। गेस्ट हाउस और होटल में एग्जिट के लिए अलग रास्ता उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन वहां ऐसा नहीं था। सारी विंडो एसी की वजह से पैक थीं या जाम हो चुकी थीं। दमकल कर्मी सीढ़ियों के सहारे कमरों की खिड़कियां तोड़कर दाखिल हुए। वहीं से लोगों को बाहर निकाला गया। आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। कारणों की जांच पुलिस को करनी है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि होटल मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। लापरवाही का केस दर्ज किया जा रहा है।

फायर ब्रिगेड की 26 गाड़ियों ने आग पर पाया काबू
फायर ऑफिसर सुनील चौधरी ने बताया कि आग पर सुबह करीब 8 बजे तक काबू पा लिया गया था। इस हादसे में मारे गए लोगों के शव भी बाहर निकाल लिए गए हैं। करीब 30 लोगों को होटल से बाहर निकाल लिया गया।

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