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सवर्ण आरक्षण बिल लोकसभा में पास, पक्ष में पड़े 323 वोट, विरोध में डाले गए तीन वोट

नई दिल्ली 8 जनवरी 2019। लोकसभा सवर्ण आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी गई है। गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण के मुद्दे पर लोकसभा में करीब पांच घंटे तक जोरदार बहस हुई। सदन में 323 सांसदों ने बिल के समर्थन में मतदान किया जबकि 3 वोट विपक्ष में डाले गए। सामाजिक कल्याण मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इस विषय पर ऐतिहासिक कदम उठाने की जरूरत थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। मोदी सरकार ने मंगलवार को (08 जनवरी, 2019) आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जातियों के लोगों को 10% अतिरिक्त आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया गया था।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाए। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 (कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018) मंगलवार को लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में बदलाव किया जाएगा।

वहीं, सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के आरक्षण से छेड़छाड़ न हो और गरीबों के बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण मिले, हम पूरी तरह सरकार के साथ रहेंगे। वहीं, एनसीपी और ‘आप’ ने भी इसे समर्थन देने की बात कही है। दूसरी ओर बसपा पहले से ही इसकी मांग करती रही है।

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