रायगढ़

अतित के धरोहर को सहजेने में परहेज, धुंधली होते जा रही अतीत की धरोहर, पुरातात्विक स्थलों का मिट रहा अस्तित्व

रायगढ़. प्रदेश में अगर इतिहास के पन्नों को पलटा जाएं तो पूरे जिलों में कई दर्शनीय, पुरातत्विक पर्यटक स्थल हैं। वहीं रायगढ़ जिले की पहचान बढ़़ाने के लिए यहां के पुरातात्विक स्थलों की भूमिका अग्रणी है। सिंघनपुर की गुफा, कबरा पहाड़, उषाकोटी जैसे ऐतिहासिक स्थल रायगढ़ जिले के नाम में दर्ज है और इन ऐतिहासिक स्थलों की पहचान बताना लगभग मूर्खता ही है। पूरे प्रदेश भर में विख्यात इन स्थलों की चमक अब देखरेख के अभाव में धुंधली हो चुकी है।

जिले के पुरातात्विक स्थलों को सवांरने का सपना लगातार दिखाया तो जा रहा है पर उसे सवंरा नहीं जा रहा है। पुरातात्विक स्थलों की सुंदरता और व्यवस्थित करने का काम सरकारी फाईलो में ही दब कर रह गई है। अब यह स्थिति है कि प्रदेश भर में विख्यात सिंघनपुर ,कबरा पहाड़ सहित अन्य स्थानों के शैलाश्रयों को बचाने की बात करने वाले पर्यटन विभाग इनकी सुध लेना भी उचित नहीं समझ रहा है। यही कारण है कि अतीत के रहस्य को आज तक कोई नहीं जान सका। इसके तह तक तो हर कोई जाने को करता है, लेकिन जिसने भी इस रहस्य को जानने की कोशिश की, वह अपने जान से हाथ धो बैठा। जिसका जीता-जागता उदाहरण सिंघनपुर की गुफा है।

यहां की छोटी-बड़ी ग्यारह गुफा का रहस्य आज भी बरकरार है। इस गुफा में क्या है यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इससे कई कहानिंया जुड़ी हुई है। वहीं इस गुफा के भीतर जाने वाले लोगों की मौत भी हो चुकी है। जिसमें एक रायगढ़ राजघराने का सदस्य भी शामिल हैं। सिंघनपुर की गुफा को लेकर वहां के ग्रामीण बताते हैं कि गुफा के भीतर इतना जेवरात व धन है कि पूरे विश्व के लोगों का ढाई दिन तक खर्चा बड़े ही आराम से चल सकता है। ग्रामीण बताते हैं कि इस धन-दौलत को ले जाना किसी के बस की बात नहीं है। इसकी सुरक्षा वहां के भंवर करते हैं। यही नहीं अब प्रशासन की उपेक्षा दंश जिले के अतीत के धरोहर झेल रहे हैं। यही कारण है कि सिंघनपुर गुफा में पूर्व में यहां 23 पेंटिंग देखी गई थी और वर्तमान में सिर्फ 13 भित्ती चित्र ही देखे जाते हैं। 30 हजार ईसापूर्व इस शैलाश्रय की खोज एण्डरसन ने वर्ष 1910 में की थी। जो अब लगभग धुंधली हो चुकी है।

आदिम युग के औजार
सिंघनपुर की में वैसे तो छोटी-बड़ी ग्यारह गुफा होने की बात ग्रामीण करते हैं, लेकिन यहां तीन गुफा ऐसे हैं जिसमें इनका रहस्य दबा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि दो गुफा के भीतर जाया जा सकता है। जहां आदिम युग के औजर व शैलचित्र हैं, लेकिन एक गुफा में जाना संभव नहीं है। उस गुफा में भंवर हैं जो भीतर नहीं जाने देते।

नही बन पाया रास्ता
यहां के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इसका कायाकल्प किया जाना था। गुफा तक पंहुचा जा सके इसके लिए यहां रोड, प्रोपोजल, सीढ़ी बनाने की योजना थी। ग्रामीण बताते हैं कि इसके लिए राशि भी आयी थी, लेकिन अब तक रोड नहीं बन पाया। यही नहीं पूर्व में यहां देखरेख के लिए एक चौकीदार भी था, लेकिन अब इसकी सुरक्षा भगवान भरोसे हो गई है।

कबरा पहाड़ भी हो गया बेजान
मुख्यालय से करीब 15 किमी. दूर स्थित गजमार पहाड़ी से लगा कबरा पहाड़ है। इस ऐतिहासिक स्थल को देखने आए दिन पर्यटक जमा होते थे, लेकिन वर्तमान स्थिति कुछ और ही दास्तां बयां कर रही है। पिछले कुछ वर्षों तक भित्ती चित्रों को देखने पर्यटक शहरी सहित ग्रामीण इलाकों से पहुंचते थे पर आज बदहाली के कारण यहां पर्यटकों में कमी देखी जा रही है। असामाजिक तत्वों ने तो पहाड़ों पर कलर पेंट से अपना नाम लिखकर पूरे भित्ती चित्रों का ही नामोनिशान मिटा दिया है। इस ऐतिहासिक स्थल को बचाने के लिए शासन ने कई बार दावे किए पर यहां की अव्यवस्था अब तक नहीं सुधरी सकी। विश्वनाथपाली से लगा कबरापहाड़ तक जाने के लिए रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मुरूम व मिट्टïी का सड़क का निर्माण इस वर्ष कराया गया है, पर वह भी किसी काम का नहीं रहा। वहीं उषाकोटी के शैलाश्रय भी अब देखरेख के अभाव में बदहाल है।

वर्सन
पहले पर्यटक सिंघनपुर की गुफा देखने के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब यहां मार्गों का देखरेख नहीं होने के कारण कोई नहीं जा पाता है। यहां बदहाली के कारण इसका अस्तित्व भी अब लगभग खत्म होते जा रहा है। यही स्थिति उषाकोटी के शैलाश्रय का भी है।
गोपाल अग्रवाल
पर्यावरण प्रेमी

वर्सन
पर्यटन विभाग व वन विभाग के द्वारा रामझरना के पास से सिंघनपुर गुफा के लिए पहुंच मार्ग बनाया जा रहा था, लेकिन वह किसी कारण से बन नहीं पाया है। हांलाकि पर्यटन विभाग पुरातत्विक स्थलों की चमक फिर से लौटाने के लिए प्रयासरत है।
एस द्विवेदी
रायगढ़ प्रभारी, पर्यटन विभाग

एक नजर में सिंघनपुर
30 हजार ईसा पूर्व
1910 में हुई थी खोज
एडंरसन ने की थी खोज
23 पेंटिंग देखे गए थे
13 अब शेष बचे हैं
इन्हें बचाने यह करना चाहिए
चौकीदार की हो नियुक्ति
मासिक निरीक्षण किया जाए
आसपास सौंदर्यीकरण किया जाए
पयर्टकों के लिए सुविधा दे
पुरातत्विक स्थलों में रखे गाईड

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