छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव दो चरण में, पहले नक्सल प्रभावित सीटों पर मतदान

आचार संहिता अक्टूबर के पहले हफ्ते में, वोटिंग दिवाली के तुरंत बाद

रायपुर. छत्तीसगढ़ में चौथी विधानसभा के लिए चुनाव इस बार दो चरणों में करवाए जाएंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) सुब्रत साहू ने चुनाव आयोग को यहां दो चरणों में चुनाव करवाने का प्लान दिया है। पहले चरण में 14 नक्सल प्रभावित जिलों की 30 विधानसभा सीटों में मतदान एक साथ कराने का प्रस्ताव है। शेष 13 जिलों की 60 सीटों पर मतदान दूसरे चरण में होगा।

प्लान के अनुसार प्रदेश में चुनावी आचार संहिता अक्टूबर के पहले हफ्ते में लगा दी जाएगी। मतदान 7 नवंबर को दिवाली के तुरंत बाद होंगे। इस प्लान पर अंतिम विचार-विमर्श के लिए दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के छत्तीसगढ़ प्रभारी उपायुक्त संदीप सक्सेना इसी महीने के अंत में रायपुर आएंगे। छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनावों को लेकर देश के चुनाव आयोग ने रोज के अपडेट की समीक्षा शुरू कर दी है। पता चला है कि चुनाव आयोग ने ही यहां से प्रदेश के विधानसभा चुनाव का संभावित प्लान मांगा था, जिसे सीईओ साहू जमा करके आए हैं।

पहले पखवाड़े में हो सकता है चुनाव का पहला चरण
संकेत मिले हैं कि साल 2013 की ही तरह इस बार भी 90 विधानसभा क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांटकर दो चरणों में चुनाव कराए जाएंगे। आयोग ने यह भी कहा था कि चुनाव के लिए फाइनल टाइम टेबल बनाने से पहले दिवाली की तारीख पर ध्यान दिया जाए। दिवाली 7 नवंबर को है, इसलिए माना जा रहा है कि प्रदेश में पहले चरण का चुनाव नवंबर के पहले पखवाड़े में ही हो जाएगा, जिसमें नक्सल प्रभावित जिलों की 30 सीटें आएंगी।

खर्च के लिए मिले 91 करोड़
विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य में प्रशासनिक खर्च के लिए राज्य निर्वाचन अधिकारी ने करीब सवा सौ करोड़ के खर्च का बजट दिया था। आयोग ने पहले चरण में इसके लिए 91 करोड़ रुपए जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार हर विधानसभा का अनुमानित खर्च एक से सवा करोड़ रुपए होगा। इसमें पोलिंग दलों को मानदेय, वोटर लिस्ट और वीवी पैट पर्ची जैसी मतदान सामग्री का प्रकाशन, ट्रांसपोर्टेशन, ईवीएम मेनटेनेंस, मतगणना, वीडियोग्राफी और वेबकास्टिंग जैसे खर्च शामिल हैं।

पहले चरण के लिए फोर्स की 1100 कंपनियां मांगीं
सीईओ साहू ने शांतिपूर्ण चुनाव खासकर नक्सल क्षेत्रों के 30 सीटों के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की 1100 कंपनियों की जरूरत बताई है। आयोग को दिए गए प्लान में सीईओ ने बताया कि यह फोर्स अतिसंवेदनशील (वर्नेलेबल) और क्रिटिकल मतदान केंद्रों में तैनात की जाएगी। प्रदेश में 23411 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यह पिछली बार से करीब दो हजार अधिक हैं। इसके अलावा आयोग से 200 और केंद्रों की अनुमति भी मांगी गई है। चुनाव के लिए नई तकनीक की ईवीएम जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जा रही हैं। इन मशीनों के नए फीचर से डीआरओ और एआरओ को प्रशिक्षित कर दिया गया है। अब सितंबर में मतदान दलों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए डीआरओ से मतदान दलों के लिए अधिकारी कर्मचारियों की सूची मांग ली गई है। एक दल में एक पीठासीन अधिकारी के साथ तीन सहयोगी शामिल किए जाएंगे। प्लान के मुताबिक 23411 पोल पार्टियों के अलावे 10 फीसदी रिजर्व दल भी बनाए जाएंगे।

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