छत्तीसगढ़

विधानसभा मानसून सत्र: 14 घंटे बहस के बाद रात 2 बजे गिरा अविश्वास प्रस्ताव

रायपुर. छत्तीसगढ़ की चतुर्थ विधानसभा के अंतिम सत्र में आरोप-प्रत्यारोप और शोर-शराबों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मंत्रिमंडल ने एक बार फिर विश्वास मत हासिल कर लिया। चतुर्थ विधानसभा में तीसरी बार प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की तरह से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव करीब 14 घंटे की बहस के बाद बहुमत के आधार पर ध्वनिमत से खारिज हो गया। विपक्ष द्वारा मत पर विभाजन पर जोर नही देने के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने मतदान नही कराया।

आगामी नवम्बर-दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ तीखे तेवर दिखाएं। लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत के कथित सेक्स सीडी कांड से सदन का माहौल गरमाया रहा।

बीजेपी नेता शिवरतन शर्मा ने अश्लील सीडी कांड पर बोलते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस ने ब्लैकमेलिंग को छोटी सी घटना बताया है। विपक्ष ने किसान, आदिवासी, भ्रष्टाचार, नौकरशाही जैसे अन्य मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया। ठीक इसके विपरित सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस अविश्वास प्रस्ताव को सरकार के प्रति विश्वास प्रस्ताव बताते हुए सरकार की उपलब्धियों को आंकड़ों के साथ पेश किया। अविश्वास प्रस्ताव पर दोपहर 12 बजे से चर्चा शुरू हुई, जो कि रात 2.30 बजे तक चली। इसमें सत्ता और विपक्ष के 28 सदस्यों ने हिस्सा लिया। चर्चा के बाद मतदान हुआ।

चंद्राकर ने कहा- बंधक बनकर रह गए नेता प्रतिपक्ष : संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा, नेता प्रतिपक्ष मुझे आज फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस के सर्किट की भूमिका में नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष बंधक बनकर रह गए। अजय चंद्राकर ने कुछ आंकड़े प्रस्तुत कर विपक्ष की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप सूचना के अधिकार के तहत जानकारी ले सकते हैं। तब भूपेश बघेल ने कहा कि ये सदन की अवमानना है। हम सदन के माध्यम से जानकारी लेते देते हैं।

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