रायगढ़

डॉक्टर्स डे पर शहर के जानेमाने डॉक्टर को किया सम्मानित

अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन रायगढ़ की अनोखी पहल

रायगढ़ टॉप न्यूज 1 जुलाई 2018। स्थानीय नगर के प्रतिभावान और वरिष्ठ डॉक्टरों का डॉक्टर्स डे पर श्रीफल और साल से सम्मानित अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन शाखा रायगढ़ के द्वारा सम्मानित किया गया। प्रांतीय अध्यक्ष रेखा महमिया के मार्गदर्शन पर प्रांतीय स्वास्थ्य सेवा प्रभारी शोभा अग्रवाल , प्रांतीय सह सचिव लक्ष्मी अग्रवाल , शाखा सचिव रीना बापोड़िया , ललिता गोयल मीनू निगानिया , सुलोचना अग्रवाल के द्वारा 11 बजे , रायगढ़ के मशहूर , विख्यात डॉक्टर ,डॉक्टर राजू अग्रवाल , डॉक्टर घनश्याम अग्रवाल , डॉक्टर रुपेन्द्र पटेल और डॉक्टर पीयूष अग्रवाल को श्रीफल और साल से उनके कार्यालय में ही सम्मानित किया गया ।
श्रीमती रेखा महमिया ने कहा कि यह संयोग ही है कि – सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉक्टर बिधान चंद्र राय के जन्मदिन पर हर साल डॉक्टर्स डे 1 जुलाई को मनाया जाता है । डॉक्टर राय का जन्म 1 जुलाई 1882 में और निधन उसी दिन 1 जुलाई 1962 को हुआ था । मुख्यमंत्री के रूप में जनता की सेवा के साथ-साथ उन्होंने आजीवन मरीजों की सेवा की उन्हीं के नाम पर भारत में चिकित्सक दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
सौभाग्य का विषय है कि आज हमारे डॉक्टर राजू अग्रवाल का भी जन्मदिन है। डॉक्टर राजू अग्रवाल ने कहा कम दवा और कम खर्च में जो इलाज करें वह अच्छा चिकित्सक । अच्छे चिकित्सक की परिभाषा करते हुए डॉक्टर राजू अग्रवाल कहते हैं कि अच्छा डॉक्टर वही है । जो कम खर्च में अच्छे से अच्छा इलाज कर दे । डॉक्टर प्रिय भाषी हो और मरीजों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, ऐसे गुणों से सुसज्जित को ही अच्छा चिकित्सक माना जाता है । चिकित्सक की परिभाषा बदल गई है।
डाँ पीयूष अग्रवाल यह कहते है कि पहले डॉक्टर को भगवान माना जाता था । लेकिन अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही है ।कई बार विश्वास की डोर टूट जाती है। मरीज महंगी सेवाएं लेते हैं । तो उसका उतना ही रिटर्न भी चाहते हैं। चिकित्सा और शिक्षा में जब से निजी मेडिकल कॉलेजों का समावेश हुआ है । तब से चिकित्सा शिक्षा महंगी होने लगी है । निजी मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले चिकित्सकों पर उनके पालकों का बहुत धन खर्च होता है । क्योंकि अब आधे से अधिक चिकित्सक निजी मेडिकल कॉलेजों से निकल रहे हैं । तो जाहिर है कि वह जब बाजार में प्रैक्टिस के लिए उतरते हैं । तो अधिक फीस वसूलते हैं । निजी अस्पताल और निजी मेडिकल कॉलेजों से निकले चिकित्सकों का कांबीनेशन एक ऐसे बाजार का निर्माण कर रहा है ।जहां केवल मोटा धन खर्च करके ही चिकित्सा सेवा खरीदी जा सकती है।

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