रायगढ़

रथकुंवर ने संघर्ष से झुकाया एसईसीएल को

कोर्ट के आदेश पर देनी पड़ी कंपनी में नौकरी , और भी पीडि़त महिलाओं के लिए आस के द्वार खोले

रायगढ़ टॉप न्यूज 28 नवंबर। आखिकार एसईसीएल ने अपने घुटने टेके और आदिवासी महिला रथकुंवर को नौकरी में रख लिया है। इसके लिए हालांकि उन्हें लंबी लड़ाई लडऩी पड़ी। इस संघर्ष में जनसंगठन जनचेतना ने इनका साथ दिया । संघर्ष आखिर रंग लाई और रथकुंवर को अंतत: नौकरी मिल गई।
जनचेतना रायगढ के अथक प्रयास से छाल की विधवा महिला रथकुवर राठिया को आखऱिकार एस ई सी एल मिल गई।  रथकुवर राठिया की जमीन छाल एसईसीएल द्वारा अधिगृहित की गई थीं जिसके बदले रथकुवर के पति भरत लाल को कोरवा में एसईसीएल द्वारा  नौकरी दी गई थीं ।  उनके पति की नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई थीं जिनके बदले रथकुवर राठिया अनुकम्पा नियक्ति की माग कर रही थीं परन्तु नौकरी नहीं मिली आखऱिकार रथकुवर राठिया जनचेतना रायगढ से मदद की अपील की। जिसके बाद जनचेतना रायगढ ने सूचना के अधिकार के तहत समस्त दस्तावेज निकाल कर आगे की कार्यवाही जारी रखी।  सतत दो सालों के कडी मेहनत कर न्याय दिलानेका प्रयास किया। इस सफलता ने अपना रंग भी दिखाया और आज इनकी मेहनत सफल हुई। जिसमें एसईसीएल रायगढ प्रबंधकव राजेश अमर एवं बिरेंद्र सिहं भल्ला का भी सहयोग मिला , हालांकि संघर्ष भी इन्हीं के प्रबंधन से था।

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