छत्तीसगढ़

डॉक्टर और मुख्यमंत्री न होता तो सरहद पर तैनात सैनिक होताः डॉ. रमन सिंह

स्कूली बच्चों ने परिसंवाद में मुख्यमंत्री से किए कई दिलचस्प सवाल

रायगढ़ टॉप न्यूज 15 नवंबर/रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज बाल दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय बाल मेले में स्कूली बच्चों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनका दिल जीत लिया। परिसंवाद कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मेधावी बच्चों ने मुख्यमंत्री से कई दिलचस्प सवाल किए। एक सवाल के जवाब में डॉ. सिंह ने कहा-अगर मैं डॉक्टर और मुख्यमंत्री नहीं होता तो शायद एक सैनिक होता और देश की रक्षा के लिए एक सैनिक के रूप में सेना की वर्दी सरहद पर तैनात रहता। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को अपने जीवन का आदर्श बताया।
डॉ. रमन सिंह से पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र की कुमारी शकुन्तला ध्रुव ने पूछा कि अबूझमाड़िया बच्चों को शिक्षक बनाने का विचार उनके मन में कैसे आया। इस पर मुख्यमंत्री ने शकुन्तला को बताया कि उस इलाके में शिक्षा की स्थिति पहले काफी खराब थी। दुर्ग के आर्यभट्ट विज्ञान केन्द्र में अबूझमाड़ की जिन बालक-बालिकाओं को शिक्षक बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वे निश्चित रूप से आगे चलकर शिक्षक बनेंगे और अबूझमाड़ का भविष्य संवारेंगे। शंकुन्तला के ही एक सवाल के जवाब में डॉ. रमन सिंह ने हंसते हुए कहा कि अगर मैं मुख्यमंत्री और आयुर्वेद डॉक्टर नहीं होता तो सायद सैनिक की वर्दी में भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा के लिए काम करता। बचपन से ही मुझे सेना की वर्दी काफी आकर्षित करती थी। डॉ. सिंह ने बच्चों से कहा कि जीवन में सफल होने के लिए हमें किसी न किसी आदर्श की जरूरत होती है। मैंने भी अपने जीवन में स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श माना है और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं।
डॉ. सिंह से छात्र डिकेन्द्र कुमार धुर्वे ने पूछा कि प्रयास आवासीय विद्यालयों की स्थापना की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली। मुख्यमंत्री ने डिकेन्द्र से कहा-मेरे एक मेधावी सहपाठी बच्चे की पढ़ाई गरीबी के कारण छूट गई थी। इस पर मुझे काफी दुःख हुआ था और मैंने सोचा था कि जब कभी मुझे ऐसा कोई अवसर मिलेगा तो मैं गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर इंतजाम करूंगा। मुख्यमंत्री बनने पर मुझे अपने इस संकल्प को पूरा करने का अवसर मिला। डॉ. सिंह ने बच्चों से कहा कि वे जिस छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वहां से सफल होकर जीवन में कुछ बनने के बाद अपने इस छात्रावास को और अपने स्कूल को जरूर याद रखें।

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